दाउद को पकड़ने के मामले पर अमेरिका भी पीछे हटा

26|11 (मुंबई हमले) के समय से रिश्ते इतने खराब रहे हैं कि यह सोचना भी अवास्तविक है कि अमेरिका आतंकवादियों को सौंपने की भारत की मांग पर इस्लामाबाद पर असर डालने की स्थिति में है। ब्लैकविल इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि दाउद और उमर को भारत को सौंपने में पाकिस्तान पर दबाव डालने के लिए उनका देश क्या कर सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में पाकिस्तान पर उस तरह का असर डालने की क्षमता नहीं है जैसा कि हम चाहते हैं।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेटों और रिपब्लिकनों के बीच यह भावना बढ़ रही है कि पाकिस्तान को अमेरिकी सैन्य सहायता तब तक प्रभावी तरीके से कम की जानी चाहिए जब तक कि पाकिस्तान अपनी सरजमीं पर आतंकवादी समूहों के खिलाफ कदम नहीं उठाता।
उन्होंने कहा कि अमेरिका में यह भावना बढ़ रही है और यदि पाकिस्तानी सेना का व्यवहार नहीं बदलता तो मुझे लगता है कि पाकिस्तान को अमेरिकी सैन्य सहायता में आवश्यक कमी करनी होगी। पाकिस्तान द्वारा परमाणु हथियारों की जखीरा इकट्ठा करने की खबरों पर ब्लैकविल ने कहा कि अमेरिका परमाणु हथियार जमा करने के पाकिस्तानी सेना के फैसले में और अधिक संयम बरतने का आग्रह करता है।












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