अवैध संबंधों में महिला को नहीं हो सकती सजा

जस्टिस अल्तमस कबीर और जस्टिस आरएम लोढ़ा की पीठ ने कल्याणी नाम की महिला की याचिका पर यह फैसला सुनाया। कल्याणी के खिलाफ शैलजा नाम की महिला ने व्याभिचार के आरोप में मामला दर्ज कराया था। शैलजा का आरोप था कि कल्याणी के उसके पति के साथ अवैध संबंध हैं। कल्याणी ने पुलिस द्वारा व्याभिचार की धाराओं में उसके खिलाफ मामला दर्ज करने को अदालत में चुनौती दी। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी, जिस पर उसने सुप्रीम कोर्ट में दरवाजा खटखटाया।
सुप्रीम कोर्ट ने व्याभिचार की धारा 497 के प्रावधान को स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें पति की मर्जी के बिना अवैध संबंध बनाने वाली महिला को नहीं, बल्कि उस पुरुष को सजा देने का प्रावधान है, जो उस महिला से अवैध संबंध बनाता है। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि इस प्रावधान की कई हलकों में आलोचना हो रही है क्योंकि इससे लिंग भेदभाव झलकता है। इसमें विवाहित महिला को जैसे उसके पति की संपत्ति बना दिया गया है। लेकिन कानून यही है, इसलिए साफ है कि व्याभिचार में पुरुष को सजा हो सकती है।
आईपीसी की धारा-497 के तहत वैसे व्यक्ति को पांच साल के कारावास या जुर्माना या दोनों सजा देने का प्रावधान है जो अपनी पत्नी के अलावा किसी अन्य विवाहित महिला से शारीरिक संबंध बनाता है। हालांकि, इस धारा के तहत इस तरह के संबंधों में महिला को अभियोग से छूट हासिल है। हालांकि इस कानून के खिलाफ पिछले साल एक याचिका दायर की गई थी, जिसे कोर्ट ने ठुकरा दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के इस जजमेंट से साफ है कि यदि कोई शादीशुदा पुरुष किसी महिला के साथ अनैतिक संबंध बनाता है, या कोई शादीशुदा महिला किसी अन्य शादीशुदा पुरुष से अवैध संबंध स्थापित करती है, तो हर मामले में पुरुष को ही सजा होगी।
सवाल आपसे- लैंगिक असमानता रखने वाले इस निर्णय से आप कितने सहमत हैं।












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