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शातिर को अपनी हत्या में मिली उम्रकैद

Murder
दिल्ली (ब्यूरो)। अपने खिलाफ चल रहे मुकदमे से बचने के लिए एक शातिर ने एक इंसान की बेवजह हत्या कर दी। चूंकि पूरा परिवार इस साजिश में शामिल था, इसलिए पत्नी और बच्चों ने शव को पति और पिता करार दे दिया। और पत्नी ने मान लिया कि उसका पति अब बच गया। चूंकि शव मिला था इसलिए हत्या का केस दर्ज हुआ और जांच भी शुरू हो गई, लेकिन घटना के एक माह बाद ही पोल खुल गई और अपनी हत्या का जाल बुनने वाले पंजाब निवासी करमा को पुलिस ने धर दबोचा।

अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए उम्रकैद और 35 हजार रुपये जुर्माना अदा करने का आदेश दिया है। मामले में शामिल दूसरा आरोपी सतनाम को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।

जिला न्यायालय रोहिणी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीके बंसल ने फैसले में कहा है कि यह अपनी तरह का एक अनूठा केस है। जिसमें आरोपी अपनी ही हत्या का मुकदमा लड़ रहा है। आरोपी के खिलाफ काफी मजबूत परिस्थतिजन्य साक्ष्य मिले हैं। यही नहीं आरोपी के ससुर के बयान को भी अदालत ने अहम माना। जिसने पुलिस को बताया था कि जिसकी हत्या का मुकदमा चल रहा है वह जिंदा है। इसके बाद अदालत ने आरोपी करमा को सजा सुनाई।

पेश मामले के मुताबिक करमा पर पंजाब में सात आपराधिक मामले दर्ज थे। जिसमें हत्या के प्रयास और एनडीपीएस के भी मामले शामिल थे। मुकदमे से बचने के लिए उसने 21 मई, 2010 को फुटपाथ पर सो रहे एक व्यक्ति की हत्या कर उसे जला दिया। उसने अपने कपड़े, मतदाता पहचानपत्र, पर्स, ड्राइविंग लाइसेंस सहित अन्य दस्तावेज रख दिए, ताकि पुलिस को लगे की उसकी (करमा) हत्या हो गई। करमा के शव की पहचान भी उसकी पत्नी और परिजनों ने कर दी थी। जून, 2010 को करमा के ससुर को पता लग गया कि करमा जिंदा है, उसने पुलिस सूचना को दे दी।

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