मुश्िकल में माया, विस चुनाव से पहले एक और मंत्री का इस्तीफा

उल्लेखनीय है कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव सिर पर है। ऐसे में भ्रष्टाचार के आरोप में एक के बाद एक मंत्रियों का इस्तीफा सत्ताधारी बीएसपी सरकार के लिये मुसिबत बन सकता है। मुख्यमंत्री मायावती ने भले ही अहिरवार का अस्तीफा ले लिया हो मगर चुनाव आते ही इस तरह की सरगर्मी से विपक्षी दलों ने भौहें सिकोड़ ली हैं। आखिर क्या वजह रही जो लगातार लग रहे आरोपों के बाद भी मंत्री साढ़े चार साल तक अपने पद का मजा लूटते रहे। राजनीतिक गलियारों में इसे देर से की गई कार्रवाई ही कहा जा रहा है।
मालूम हो कि सोमवार को ही विपक्ष और लोकायुक्त ने मुख्यमंत्री को रिपोर्ट भेज दी थी और अहिरवार को तत्काल मंत्री पद से हटा देने की सिफारिश की थी। कांग्रेस प्रवक्ता वीरेंद्र मदान ने आरोप लगाया था कि लोकायुक्त की जांच में दोषी सिद्ध होने के बावजूद मुख्यमंत्री मायावती अम्बेडकर ग्राम विकास राज्य मंत्री रतन लाल अहिरवार को बचाने में जुटी है। नैतिकता का तकाजा तो यह है कि भ्रष्टाचारियों से भरे मंत्रिपरिषद की जिम्मेदारी लेते हुए खुद मुख्यमंत्री को अविलम्ब इस्तीफा दे देना चाहिए।












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