सरकार का लोकपाल तो केवल मजाकिया जांचकर्ता है: किरण बेदी

Kiran Bedi
नई दिल्ली। संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है लेकिन एक भी एफडीआई पर जन्में विवाद के बाद संसद एक भी दिन चली नहीं है इसलिए अन्ना टीम में पहले से ही खलबली है। कि इस बार भी लोकपाल बिल पास होगा कि नहीं तो वहीं केन्द्र की स्टैंडिग कमेटी की ओर से लोकपाल का जो मसौदा तैयार किया गया है उससे खुद अन्ना हजारे काफी नाराज है।

उन्होंने कहा कि सरकार अपने वादे से मुकर गयी है। किरण बेदी ने साफ तौर पर कहा कि सरकार की ओर से लोकपाल बिल का मजाक बना दिया गया है।सरकार का लोकपाल केवल जांचपाल है, उसके पास कोई अधिकार नहीं है। बेदी ने कहा कि हमने अन्य सीवीसी के लिए आंदोलन नहीं किया था जिसे कोई अधिकार नहीं हो। लोकपाल की हालत ठीक पोस्टऑफिस की तरह हो कर रह गयी है। सीबीआई मुख्य बावर्ची है, उसे इस दायरे में लाया नहीं गया है जो कि अफसोसजनक है।

इससे पहले अन्ना हजारे ने खुद सरकार के ऊपर वादाखिलाफी का आरोप लगाया था। अन्ना सरकार के रवैये से बहुत ज्यादा नाराज है। अन्ना ने स्टैंडिंग कमेटी के सुझावों पर नाराज़गी जताई है। अन्ना ने कहा कि रामलीला मैदान में मनमोहन सिंह ने जो खत भेजा था उसके मुताबिक स्टैंडिंग कमेटी के सुझाव नहीं है, जो कि सरासर गलत है। पीएम साहब ने हमसे धोखा किया है। उस समय अनशन तोड़वाने के लिए उन्होंने हमारी सारी बातें मान ली थी और अब मुकर गये हैं।

अन्ना ने कहा कि अगर ज़रूरत पड़ी तो वे मजबूत और प्रभावी लोकपाल के लिए एक बार फिर आंदोलन करेंगे। वैसे भी अन्ना ने 11 दिसंबर को जंतर मंतर पर एक दिन के अनशन का ऐलान कर दिया है।

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