दिल्ली: मासूम के अपहरण में उम्रकैद, दो बरी

जिला न्यायालय रोहिणी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुधीर कुमार जैन ने फैसले में कहा कि बच्चों के प्रति अपराध में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। भारत आर्थिक रूप से समृद्ध हो रहा है, लेकिन बच्चों के प्रति हो रहे अपराध में कमी नहीं आ रही है। अदालत ने कहा कि औसतन प्रतिवर्ष भारत में 40 हजार बच्चे गुम होते हैं। जिसमें से 11 हजार बच्चों का पता भी नहीं चल पाता। पेश तथ्यों के आधार पर आरोपी वीरेंद्र को दोषी करार देते हुए उम्रकैद जबकि दीन दयाल और सुभाष को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
अपहरण कांड में पीड़ित का चाचा भी शामिल था। वीरेंद्र ने आकाश के चाचा और तीन अन्य के साथ मिलकर दो अक्तूबर 2004 को मंगोलपुरी से आकाश का अपहरण कर लिया था। इसके बाद फिरौती के लिए छह लाख मांगे। आकाश के पिता ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर पांच अक्तूबर को बच्चे को भी बरामद कर लिया था।












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