अमेरिका के खिलाफ यूएन में एकजुट हुए चीन व पाकिस्तान

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के राजदूत हुसैन हारून ने संयुक्त राष्ट्र को लिखे खत में कहा है कि नाटो सेना का पाकिस्तानी सेना पर किया गया हमला देश की आजादी, संप्रभुता और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला है। यूएन अध्यक्ष बानकी मून को लिखे अपने खत में अब्दुल्ला हुसैन ने कहा है कि पाकिस्तान पिछले काफी समय से आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका का साथ देता आया है। ऐसे में नाटो सेना का यह कदम बहुत ही खेदनीय है। इससे पाकिस्तान की आवाम में रोष है और कोई नहीं चाहता कि अमेरिका की सेना अब पाकिस्तान या अफगानिस्तान में ज्यादा देर रुके।
पाकिस्तान पहले ही अमेरिका को 15 दिनों के अंदर अपने देश से अपनी सेनाएं हटाने की धमकी दे चुका है। ऐसे में पाकिस्तान इस हमले का हवाला देते हुए अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना हटाने का मामला उठा सकता है। चीन इस पूरे मामले में पाकिस्तान का भरपूर योगदान कर रहा है। चीन एशिया में अमेरिका के दखल को पूरी तरह बंद करना चाहता है। अब देखना है कि अफगानिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई को जारी रखने के लिए अमेरिका रूठे हुए पाकिस्तान को मना पाता है या नहीं। अफगानिस्तान में जंग पाकिस्तान की जमीन के बिना संभव नहीं है। पाकिस्तान भी अफगानिस्तान के कुछ हिस्सों पर हमला कर कब्जा जमाना चाहता है। जिस वजह से वह वह नाटो और अमेरिकी सेना को वहां से हटाने की मांग कर सकता है।












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