टीम अन्ना को दोहरा झटका, राष्ट्रमंडल खेलों पर भी याचिका खारिज

Team Anna
दिल्ली (ब्यूरो)। टीम अन्ना को शनिवार को दोहरा झटका लगा। एक तरफ जहां टीम अन्ना की सक्रिय सदस्य किरण बेदी के खिलाफ एचआईआर दर्ज कराने का आदेश हुआ वहीं दूसरी तरफ पटियाला हाउस कोर्ट ने टीम अन्ना के सदस्यों की उस अपील को अस्वीकार कर दिया है, जिसमें उन्होंने राष्ट्रमंडल खेल आयोजन से संबंधित सभी मामलों में भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज करने के लिए जांच एजेंसियों को निर्देश देने की मांग की थी।

पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य महानगर दंडाधिकारी अमित बंसल ने कहा कि याचिका को खारिज किया जाता है। जहां तक राष्ट्रमंडल खेल आयोजन में घोटाले की बात है तो वह अभी कोई निर्देश जारी नहीं कर सकते हैं। उन्होंने मामले की सुनवाई सात फरवरी को तय कर दी है। कोर्ट ने कहा कि टीम अन्ना के सदस्य किरण बेदी, अरविंद केजरीवाल आदि के पास अगर अपने दावों के समर्थन में कोई सुबूत है तो वे उसे पेश कर सकते हैं। इस छटके के तुरंत बाद ही वहीं स्थानीय अदालत में टीम अन्ना की अहम सदस्य किरण बेदी पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। जिसके तहत उनपर धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र, विश्वासघात व बैंक खातों में हेरफेर का आरोप है। हालांकि इस समय किरण बेदी पर दिल्ली की क्राइम ब्रांच ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। वैसे कयास लगाया जा रहा है कि उनकी इस मामले में कभी भी गिरफ्तारी हो सकती है।

आपको बता दें कि अधिवक्ता देवेंद्र सिंह चौहान ने किरण बेदी पर आरोप लगाया है कि वह अपने एनजीओ के नाम से फंड लेकर उसका दुरुपयोग कर रही हैं। आरोप के पक्ष में उन्होंने साक्ष्य भी पेश किए। देवेंद्र का कहना है कि बेदी के गैर सरकारी संगठन इंडिया विजन फाउंडेशन को मेरी पुलिस कार्यक्रम के लिए सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट से 50 लाख रुपये दान में मिले। पैसों से एनजीओ को बीएसएफ, सीआइएसएफ, आइटीबीपी, सीआरपीएफ और अन्य राज्य पुलिस संगठनों के जवानों के बच्चों व परिवार के सदस्यों को मुफ्त कंप्यूटर शिक्षा मुहैया करानी थी।

कहा गया है कि मेरी पुलिस कार्यक्रम के तहत मुफ्त कंप्यूटर शिक्षा देने के नाम पर जो सेंटर खोले गए थे, वहां से प्रति सेंटर 20-20 हजार रुपये लिए जाने लगे। यह पैसा सीधे बेदी के खाते में जाने लगा। एक ओर बेदी ने मुफ्त शिक्षा देने के नाम पर माइक्रोसाफ्ट से फंड लिया और दूसरी ओर कंप्यूटर सेंटर से भी पैसे ले लिए। जब सेंटर चलाने वाले रुपये दे रहे हैं, तो वे बच्चों से फीस भी वसूलते होंगे। फिर कंप्यूटर शिक्षा मुफ्त कहां हुई। सेंटर खोलने की जिम्मेदारी एक अन्य संस्था को दी गई थी, जिससे छह हजार रुपये भी वसूल किए जाते रहे। बात फैलाई गई कि सेंटर की जगह व बिजली आदि का खर्चा किरण बेदी द्वारा किया जा रहा है, जबकि जगह व बिजली पुलिस व अ‌र्द्धसैनिक बलों की तरफ से मुहैया कराई गई।

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