ताज में कितना है दम, परखने का काम शुरू

पिछले दिनों ताज के स्थायित्व को लेकर उठे सवालों के बाद देश की सर्वोच्च अदालत ने मामले को संज्ञान में लिया था। ताज की बुनियाद को कमजोर हो रहा है यह खबर दैट्स हिंदी में भी चली थी। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के कार्यों से असंतोष भी जाहिर किया कि इतनी महत्वपूर्ण इमारत पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ताज की बुनियाद पर उठे सवालों ने भारतीय पुरातत्व विभाग का भी ध्यान खींचा। लिहाजा विभाग ने देश की चार प्रमुख एजेंसियों को ताज की बुनियाद और स्थायित्व परीक्षण के लिए कहा।
इसी सिलसिले में सर्वे आफ इंडिया की टीम ने आगरा में कैंप किया और परीक्षण का काम शुरू कर दिया। सूत्रों के अनुसार दो साल पूर्व सर्वे आफ इंडिया ने परीक्षण किया था। उस समय के अध्ययन के मद्देनजर फिर कार्य शुरू हुआ है। भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीक्षण पुरातत्वविद् आईडी द्विवेदी ने बताया कि मीनारों की वर्टिकलटी और स्थायित्व आदि का अध्ययन किया जाएगा। गौरतलब है हाल में खबरें आई थी कि ताजमहल की नींव गलने लगी है। कहा गया था कि अगर जल्द ही कोई तरीका नहीं खोजा गया तो यह हैरतअंगेज इमारत दो से पांच साल के अंदर ध्वस्त हो जाएगी। यहां बता दें 358 साल पुराने इस मकबरे का निर्माण मेहोगनी लकड़ी के खंभे पर किया गया है।
यह खंभे कुओं में बनाए गए हैं। इन कुओं में पानी यमुना नदी से आता है। यमुना में पानी घटने के कारण इन कुओं में पानी नहीं पहुच रहा है । धीरे -धीरे ये कुएं सूखने लगे हैं और ताजमहल की नींव कमजोर पड़ने लगी है। यमुना से पानी नहीं मिलने के कारण नींव में बने लकड़ी के खंभे सड़ने लगे हैं। नींव कमजोर पड़ने के कारण मकबरे के हिस्सों में दरारें पड़ गईं हैं। मीनारें थोड़ी झुक गई हैं। यमुना नदी के किनारे लगे तमाम उद्योगों में नदी के पानी का इस्तेमाल होता है। प्रदूषण बढ़ गया है। सड़कों के नाम पर लगातार पेड़ काटे जा रहे हैं। पेड़ों के कारण आंधी के दौरान ताजमल का धूल से बचाव होता रहा है। हर साल यमुना का पानी पांच फीट नीचे जा रहा है। इस वजह से पानी की जबरदस्त कमी होती जा रही है।












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