गुडग़ांव में उमड़ा विदेशी पक्षियों का हूजूम

पिछले कई दिनों से दुनिया के कौने-कौने से यहां विदेशी पक्षियों का आना जारी है। विभिन्न देशों से हर वर्ष सर्दियों के मौसम में विभिन्न प्रजाति के पक्षी अपना वंश बढ़ाने के लिए आते हैं। यहां आने वाले पक्षियों में ओरियन्टल हनी बुजार्ड, यूरेशियन मार्स हैरियर, रूफी, सारस के्रन, इम्पीरियल ईगल, इन्डियन बुश लार्क और टाउनी पिपिट सहित अन्य कई प्रजातियों के मेहमान शामिल हैं। पक्षियों की चहचाहट से आजकल सुलतानपुर झील की सुन्दरता देखते ही बनती है।
पक्षियों के आते ही आम दिनों की अपेक्षा यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में भी काफी वृद्धि हुई है। खासकर सप्ताह के अन्तिम दिनों में सभी कमरे बुक होने के कारण लोगों को कई बार रात में रूकने का मौका नहीं मिलता और वे दिन में ही इन पक्षियों की झलक को अपने कैमरों में समेट कर वापिस लौट जाते हैं। इस बार पक्षियों व पर्यटकों की सुविधा के लिए झील का सौन्दर्यकरण भी किया गया है।
पक्षियों के लिए विशेषतौर पर गुल्लर, पीपल, बरगद और पिलखन के पेड़ लगाए गए हैं। उद्यान की चारदीवारी का कार्य भी पूरा किया जा चुका है। पर्यटकों की सुविधा के लिए एक वाचटॉवर बनाया गया है जिस पर जाकर पर्यटक दूरबीन के माध्यम से इन मेहमानों का करीब से नजारा लेने के साथ-साथ उनकी दिनचर्या को भी समझ सकते हैं। यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या के लिए प्रसाधन सुविधाओं को सुधारने के साथ-साथ पक्षियों और उद्यान के प्रचार के लिए आकर्षित करने वाले पैम्पलेट व बोर्ड भी बनवाये गए हैं।
पर्यटकों की सुविधा के लिए सूचना केन्द्र का नये सिरे से सौन्दर्यकरण किया गया है जिसमें उद्यान व पक्षियों से सम्बन्धित फोटो व पठ्न सामग्री है जिसके माध्यम से लोग पक्षियों के जीवन के बारे में जानकारी ले सकते हैं। सूचना केन्द्र में केवल मात्र एक बटन दबा कर इन पक्षियों की आवाज को भी सुना जा सकता है। इन मेहमान पक्षियों और आने वाले पर्यटकों की सुविधा को देखते हुए जंगली घास व अन्य अवांछनीय पौधों आदि को भी साफ करवाया गया है। दुनिया के कौने-कौने से आने वाले इन विदेशी पक्षियों का सर्दियां शुरू होते ही लगभग अक्तूबर माह के आस-पास झील पर आना शुरू हो जाता है। ये पक्षी यहां विशेषतौर पर प्रजनन क्रिया के लिए आते हैं और लगभग तीन महीने तक अपनी मधुर आवाजों से पर्यटकों का मन मोह लेते हैं। ये पक्षी हर वर्ष जनवरी माह के आस-पास पर्यटकों के मन में अपनी एक अमिट छाप छोड़ कर अपने-अपने देशों को लौट जाते हैं।












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