विमानन कंपनियों को पीएम ने दिया आश्वासन, करेंगे मदद

Prime Minister Manmohan Singh
दिल्ली (ब्यूरो)। घाटे से उबरने की कवायद के बीच विमानन कंपनियों के प्रमुखों ने शनिवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्हें टैक्स, फ्यूल और एयरपोर्ट शुल्क में कमी की मांग रखी। हालांकि मनमोहन सिंह ने इन लोगों की बातें बड़े ही ध्यान से सुनी पर कुछ ठोस आश्वासन नहीं दिया। पर इतना जरूर उन्होंने कहा कि जहां तक संभव हो पाएगा सरकार आप लोगों की मदद करेगी।

सूत्रों ने बताया कि एयरलाइन प्रमुखों ने पीएम को उद्योग के समक्ष मौजूद चुनौतियों के बारे में अवगत कराया और इससे निपटने में सरकार की मदद मांगी। उन्होंने विमान ईधन एटीएफ पर टैक्स को तर्कसंगत बनाने, एयरलाइनों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति देने का प्रधानमंत्री से अनुरोध किया। साथ ही नई ग्राउंड हैंडलिंग पॉलिसी, एयरपोर्ट टैक्स और दूसरे देशों के साथ द्विपक्षीय समझौतों के तहत उड़ानों के मुद्दे भी उठाए। किंगफिशर के सीईओ संजय अग्रवाल, जेट एयरवेज के मालिक नरेश गोयल, इंडिगो के प्रमुख राहुल भाटिया, स्पाइसजेट के कर्ताधर्ता नील मिल और गो एयर के मुखिया जेह वाडिया प्रधानमंत्री से मुलाकात करने वालों में शामिल थे।

उन्होंने कहा कि एटीएफ की कीमतें पिछले दो साल में 30 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी हैं। एयरलाइनों की लागत में एटीएफ की एक-तिहाई से ज्यादा भूमिका होती है। ऊंचे केंद्रीय करों और राज्य सरकारों के बहुत ज्यादा बिक्रीकर के साथ एटीएफ की कीमतें भारत में सबसे ज्यादा हैं। ऐसे में एयरलाइनों के लिए कारोबार चलाना मुश्किल हो गया है। लिहाजा, सरकार को करों को तर्कसंगत बनाने के लिए तत्काल उपाय करने चाहिए। छोटी और बजट एयरलाइनों ने पहले ही अपना कारोबार समेट लिया है। इनका बड़ी एयरलाइनों में विलय हो गया है। हाल के तिमाही नतीजों में किंगफिशर के अलावा जेट एयरवेज और स्पाइसजेट ने घाटा दिखाया है। इन्हें इकोनॉमी क्लास की सीटों पर नुकसान हो रहा है।

ऐसे में बिजनेस क्लास की सीटों में बढ़ोतरी करने का दबाव है। घाटे में चल रही किंगफिशर ने अपनी तमाम उड़ानें इसी कारण रद कर दीं हैं। वह अपने विमानों में बिजनेस क्लास की सीटें बढ़ा रही है। एयरलाइन प्रमुखों ने एयरलाइन उद्योग में एफडीआइ का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि खुदरा रिटेल में एफडीआइ की तरह सरकार को भारतीय एयरलाइनों में भी विदेशी एयरलाइनों के निवेश के लिए दरवाजे खोल देने चाहिए। सूत्रों के मुताबिक, एयरलाइंस कंपनियों के प्रतिनिधियों ने इस बारे में औद्योगिक नीति व संव‌र्द्धन विभाग के 26 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति के कैबिनेट प्रस्ताव का जिक्र भी किया और कहा एफडीआइ की सीमा इससे भी ज्यादा होनी चाहिए। एयरलाइन प्रमुखों ने प्रधानमंत्री के साथ बढ़ती ब्याज दरों और ग्लोबल आर्थिक मंदी से भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे असर की चर्चा की। साथ ही रुपये की गिरती और क्रूड की बढ़ती कीमतों से एयरलाइनों पर पड़ रहे प्रभाव का भी जिक्र किया।

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