भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले डीआईजी को करप्शन विभाग का जिम्मा

श्री मिश्र के हटने से अब आसानी से इस फाइल को अंजाम दिया जा सकता है। श्री मिश्र ने पिछले माह फायर विभाग में बड़े घोटाले की बात कहते हुए मुख्यमंत्री मायावती पर भी भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाये थे। सरकार ने उन्हें पागल बातते हुए जबरन मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग अस्पताल में भर्ती करा दिया गया था। विरोधियों के दबाव के बाद 9 नवम्बर को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी थी। इसके बाद से श्री मिश्र एक माह के अवकाश पर हैं। इस दौरान यह भी बात सामने आयी कि श्री मिश्र पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और उनके किसी से मिलने-जुलने पर भी पाबंदी है।
यहां तक की उनके बारे में फायर विभाग कोई अधिकारी भी बात नहीं करना चाहता। बहरहाल अपने सीनियर्स को भी करप्शन के आरोपों में लपेटने वाले मिश्रा के रातोंरात ऐंटि-करप्शन ब्यूरो में तैनाती से पूरा पुलिस महकमा हैरान है। वहीं कुछ अधिकारियों का कहना है कि श्री मिश्र को जिस एंटी करप्शन विभाग भेजा गया है, वह अहम नहीं है, विभाग के पास पावर कम है। वहीं सवाल यह भी है कि श्री मिश्र की दिमागी हालत खराब है तो उन्हें अन्य विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी क्यों सौंपी जा रही है और यदि वह ठीक हैं तो अचानक उनके तबादले का क्या औचित्य।












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