यूपी वालों को भिखारी कह राहुल गांधी ने संविधान का उल्‍लंघन किया

Rahul Gandhi
बैंगलोर (अजय मोहन)। इसे उत्‍तर प्रदेश में सत्‍ता को पाने की छटपटाहट कहें या केंद्र में गिरती साख से हुई घबराहट। कांग्रेस महासचिव व पार्टी के युवराज राहुल गांधी इस कदर नीचे गिर गये कि वे भूल गये कि वो देश के सामाजिक व आर्थिक उत्‍थान के लिए जिम्‍मेदार व्‍यक्तियों में से एक हैं। यूपी पहुंच कर उन्‍हें इस कदर गुस्‍सा आया कि उन्‍होंने भारतीय संविधान तक का उल्‍लंघन कर डाला, वो भी यह कहकर कि, "कब तक यूपी के लोग महाराष्‍ट्र में भीख मांगेंगे और पंजाब में मजदूरी करेंगे।"

आप सोच रहे होंगे इसमें संविधान का उल्‍लंघन कहां हुआ। तो हम आपको बताते हैं। असल में भारतीय संविधान के अनुच्‍छेद 19 के तहत भारत एक है और हर नागरिक को देश में कहीं भी, जाने का, रहने का और काम करने का अधिकार है। यह कहना कि कब तक महाराष्‍ट्र में जाकर काम करेंगे, यह पूरी तरह अनुच्‍छेद 19 के खिलाफ है। अब बात आती है अनुच्‍छेद 21 की। इसके अंतर्गत आप किसी भी व्‍यक्ति, समुदाय, स्‍थान या प्रांत के लिए अपमानित शब्‍दों का इस्‍तेमाल सार्वजनिक तौर पर नहीं कर सकते। चूंकि राहुल गांधी एक जनप्रतिनिधि हैं और इलाहाबाद के फूलपुर में एक संगठन (कांग्रेस) की ओर से बोल रहे थे, लिहाजा यह इस अनुच्‍छेद का व्‍यापक स्‍तर पर उल्‍लंघन है।

इस पर हमने अखिल भारतीय अधिकार संगठन के अध्‍यक्ष डा. आलोक चांटिया से बात की तो उन्‍होंने इसे सरासर देश के संविधान का उल्‍लंघन करार दिया। उन्‍होंने कहा कि इस तरह अनुच्‍छेद 19 व 21 का उल्‍लंघन करके उन्‍होंने देश की अखंडता को ठेस पहुंचाई है। उन्‍होंने कहा कि विकास की दृष्टि से भले ही देश को राज्‍यों में बांटा गया है, लेकिन हैं तो भारत के अभिन्‍न अंग ही, तो प्रांतवाद की भाषा राहुल गांधी ने क्‍यों इस्‍तेमाल की। इंदिरा गांधी मुक्‍त विश्‍वविद्यालय के काउंसिलर व श्री जय नारायण पीजी कॉलेज, लखनऊ के रीडर डा. चांटिया ने अपने संगठन की ओर से मांग की है राहुल गांधी अपने बयान के लिए यूपी की जनता से माफी मांगनी चाहिये।

वहीं लखनऊ के वरिष्‍ठ पत्रकार एवं राष्‍ट्रीय पत्रिका एराउंड दि इंडिया के संपादक राजेश आनंद का कहना है कि राहुल गांधी ने जो कुछ भी कहा, एकदम सही कहा, बस कहने का तरीका और "भीख" शब्‍द का इस्‍तेमाल गलत था। सच पूछिए तो यूपी से निकलने वाली प्रतिभाओं को उनके प्रदेश में सही प्‍लेटफॉर्म नहीं मिल पाने के कारण ही वे मुंबई, बैंगलोर भागते हैं। यदि अपने ही राज्‍य में उन्‍हें अच्‍छी कंपनियां मिलें तो लोग बाहर क्‍यों जायें।

कुल मिलाकर देखा जाये तो इस बयान ने सीधे तौर पर राहुल गांधी पर बयान उठाये हैं। राहुल गांधी ने इससे पहले जुलाई 2011 में मुंबई धमाकों के दौरान भारत में आतंकवाद पर दिये गये बयान पर भी ऐसा ही बवाल उठा था। इन सभी से जो एक बात सामने आती है, वो यह कि राहुल को अब मेच्‍योर हो जाना चाहिये। वो अब इममेच्‍योर नहीं रहे हैं, इस उम्र में उनके पिता ने प्रधानमंत्री के रूप में देश की बागडोर संभाल ली थी।

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