माया के एक और मंत्री, दो विधायकों को लोकायुक्त का नोटिस

लोकायुक्त के यहां दर्ज शिकायत के मुताबिक श्री प्रसाद पर मंत्रित्वकाल में ही भ्रष्टाचार कर 15 करोड़ रूपये की की जमीन खरीदने, पेट्रोलपम्प, ट्रैक्टर एजेन्सी और विद्यालय और कुछ अन्य सम्पत्ति बनायी है यहीं नहीं इन मंत्री पर हाल ही में एक एक युवती ने बलात्कार के आरोप लगाये थे, हालांकि मुख्यमंत्री ने उन्हें इस मामले में क्लीन चिट दे दी है।
फायर सर्विस के उपमहानिरीक्षक डी.डी. मिश्रा ने भी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए श्री प्रसाद का खास तौर पर नाम लिया था और कहा था कि चित्रकूट में पुलिस अधीक्षक रहते समय उन पर श्री प्रसाद ने गलत काम करने के लिए दबाव बनाया था। मिश्र का आरोप था कि गलत काम करने से मना करने पर उनके खिलाफ शिकायत की गयी थी। डीडी मिश्र को सरकार ने मानसिक रोगी बताते हुए अस्पताल में भर्ती करा दिया।
वहीं कभी सबसे ताकतवर मंत्री रहे बाबू सिंह कुशवाहा के खिलाफ झांसी के अरविन्द सोनी ने कई सौ करोड़ रूपये की धनउगाही का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि खनन मंत्री रहते हुए कुशवाहा ने अपने नजदीकी लोगों और रिश्तेदारों को अकूत सम्पत्ति कमाने में मदद का आरोप लगाया है। उन पर यह भी शिकायत है कि उन्होनें अपने नजदीकी दिलीप सिंह और राहुल सिंह को नियम कानून की धज्जियां उडाते हुये कई-कई एकड़ खनन के पट्टे दे दिये। भान्जे को शराब की दुकान खुलवायी।
मालूम हो कि यह वहीं कुशवाहा है जिन्हें राजधानी में दो मुख्य चिकित्साधिकारियों की हत्या के बाद मुख्यमंत्री मायावती ने अपने मंत्रिमंडल से हटा दिया था। उन पर राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में घोटाले के आरोप भी लगे। इन दोनों के अलावा इलाहाबाद जिले के करछना क्षेत्र से विधायक आनन्द कुमार उर्फ कलेक्टर पाण्डेय के खिलाफ भ्रष्ट तरीके से अकूत सम्पत्ति अर्जित करने की शिकायत आई है। इन्हें भी 15 दिन में जवाब देने का आदेश दिया गया है।
इन पर आरोप है कि इन्होंने वर्ष 2007 के चुनाव में 1.75 लाख अपने और 1.40 लाख रूपये पत्नी अजय कुमारी के नाम होने का शपथपत्र दिया था, अब सरकार बनने के साथ ही इनके पास करोड़ों की सम्पति है। इन पर अवैध तरीके से करोड़ों की जमीन खरीदने की शिकायत है। पाण्डेय पर बैंकों में करोड़ो रूपये जमा होने और तालाब पर कब्जा करने का भी आरोप लगाया गया है। इससे पहले भी बसपा के कई मंत्रियों के खिलाफ लोकायुक्त की जांच चली, जिसमें कुछ तो अपना पद भी गंवाना पड़ा।












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