उमर को धक्का, नहीं हटेगा विशेष फौजी कानून

पीएम मनमोहन सिह ने रक्षा मंत्री एंटनी से बातचीत करने के बाद उमर को बता दिया है कि इस प्रस्ताव पर एक साल विचार किया जाएगा। वैसे, एएफएसपीए को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना चुके उमर को बीच का रास्ता देने के लिए केंद्र इस विकल्प पर विचार कर रहा है कि इस कानून में तब्दीली किए बिना कुछ शहरी इलाकों से सेना हटा ली जाए। इसके पीछे मंशा यह है कि आपात स्थिति की चुनौतियों से निपटने के लिए सेना के पास एएफएसपीए कानून का 'कवच" बना रहे और बैरक में ही सही, मगर सेना भी मौजूद रहे।
सूत्रों के मुताबिक, सेना ने जम्मू में यूनिफायड कमांड की आखिरी बैठक के बाद केंद्र को सौंपी रिपोर्ट में कहा है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान में बदलते परिदृश्य के चलते सूबे में ऐसी ढील घातक हो सकती है। सेना को अंदेशा है कि अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना के घटते ही पाक, कश्मीर में हिंसा शुरू कर सकता है। फरवरी के बाद बर्फ पिघलने की सूरत में घुसपैठ बढ़ने और अलगाववादियों की ओर से हिंसा भड़काने की आशंका का जिक्र भी रिपोर्ट में है।
केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के चुनिंदा इलाकों से एएफएसपीए हटाने के मामले में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को संयम बरतने की सलाह दी है। चुनिंदा इलाकों से यह कानून हटाए जाने पर सेना के लगातार विरोध की काट ढूंढ़ने दिल्ली पहुंचे उमर को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सहित वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री पी. चिदंबरम से सोमवार को और रक्षा मंत्री एके एंटनी के साथ रविवार को हुई मुलाकातों में उमर को ठोस संदेश मिल चुका था कि केंद्र जल्दबाजी में एएफएसपीए हटाने के मूड में नहीं है।
शायद इसीलिए उमर ने सोमवार की भेंट के बाद कहा कि वह देश की सुरक्षा के सवाल पर किसी तरह की राजनीति नहीं कर रहे। उन्होंने कहा कि एएफएसपीए हटाने का मामला एक लंबी प्रक्रिया है और बातचीत से इस मुद्दे पर केंद्र के साथ मतभेद कम हुए हैं। उमर इस सिलसिले में सुबह पीएम निवास, सात रेस कोर्स रोड पहुंचे और मनमोहन से लंबी बातचीत की। मनमोहन साफ बता दिया कि फिलहाल सैन्य कानून हटाने पर विचार नहीं किया जाएगा।












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