गिलानी से गिला नहीं पर आंख मूंदकर भरोसा भी नहीं

मालदीव से लौटते समय मनमोहन सिंह ने कहा, उन्हें ऐसा लगता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच शांति प्रक्रिया को बहाल करने में पाकिस्तान सरकार को सेना का साथ मिला हुआ है। लेकिन वो किसी भी सूरत में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री युसुफ रजा गिलानी पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं कर रहे हैं। मनमोहन सिंह ने ये भी कहा कि दोबारा बहाल हुई शांति प्रक्रिया को लेकर वे बेहद आशावादी हैं, लेकिन अगर मुंबई हमलों की तरह कोई दूसरा 'जघन्य' हमला हुआ तब इस प्रक्रिया को 'धक्का' लग सकता है। जब मनमोहन सिंह से पूछा गया कि पाकिस्तानी विदेश मंत्री हिना रब्बानी ख़ार के इस दावे पर कि भारत के साथ शुरू किए गए शांति प्रक्रिया को सेना का समर्थन प्राप्त है, तब उन्होंने कहा कि, "मैंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री युसूफ रजा गिलानी से इस बात पर चर्चा की थी कि क्या शांति प्रक्रिया को पाकिस्तानी सेना का समर्थन प्राप्त है, तब मुझे यही लगा की हां, ऐसा ही है।"
प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री युसूफ रजा गिलानी को शांतिप्रिय इंसान बताने पर सफाई दी है। मनमोहन सिंह ने कहा कि उनकी गिलानी से जितनी भी बार मुलाकात हुई है, गिलानी ने ना सिर्फ बातचीत को शांति का एकमात्र बताया है बल्कि ये भी माना है कि आतंकवाद से किसी का भला नहीं हो रहा। मनमोहन सिंह ने कहा कि वे ऐसा मानना चाहेंगे कि पाकिस्तान में एक लोकतांत्रिक सरकार है जिसे भारत और मजबूत करना चाहता है। वे मानते हैं कि गिलानी के नेतृत्व वाली पाकिस्तान सरकार भी भारत के साथ काम करना चाहती है। इस सवाल पर कि क्या वे सचमुच गिलानी पर विश्वास करते हैं, प्रधानमंत्री ने साफ किया कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की अच्छी नीयत के बावजूद वो उन पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं कर रहे हैं।
मनमोहन सिंह के अनुसार पाकिस्तान के भारत को सबसे पसंदीदा राष्ट्र का दर्जा दिए जाने के बाद दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू करना बेहद ज़रूरी है। इससे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते भी बेहतर होंगे। प्रधानमंत्री के मुताबिक उन्होंने गिलानी को ये अच्छी तरह से समझा दिया है कि भारतीय जनमानस इस बात से दुखी है कि मुंबई हमले के लिए दोषी लोगों को अब तक सज़ा नहीं मिल पाई है, और इस हमले के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर शांति-वार्ता में दिक्कतें आ सकती हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की तरफ़ भारत का रुख जांच करने के बाद विश्वास करने का है। उनका कहना था, "अगर भारत को उसके ख़िलाफ चलाए जा रहे आंतकी घटनाओं में पाकिस्तान के शामिल होने के सबूत मिलते हैं तो ये शांतिवार्ता के लिए बहुत बुरा होगा।"












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