आखिर अन्ना या भागवत में से झूठ कौन बोल रहा है?

यहां तक कि हिसार में अन्ना टीम के अहम सदस्य अरविंद केजरीवाल ने बकायदा मीडिया से बात करके कहा था कि अन्ना का आंदोलन जनता के लिए था, इसमें अगर कोई जुड़ा था तो वो थी देश की मासूम जनता, ना कि कोई सियासी पार्टी। इसलिए अन्ना के आंदोलन का क्रेडिट लेना आरएसएस बंद करे।
खुद अन्ना हर बार कहते आये हैं कि वह आजतक मोहन भागवत से नहीं मिले हैं और ना ही उनकी कभी संघ के लोगों से कोई बात-चीत हुई है। सत्य, अहिंसा के मार्ग पर चलकर लोगों के लिए आदर्श बनने वाले समाजसेवी अन्ना हजारे की बात पर किसी को कोई संदेह नहीं है लेकिन दूसरी ओर संघ प्रमुख मोहन भागवत का भी एक आदर्श व्यक्तित्व है।
वो भी अपनी सच्चाई और उसूलों के लिए पसंद किये जाते रहे है। हमेशा से अपने आप को और संघ परिवार को सियासत से दूर रखने का दावा करने वाले भागवत का कहना है कि वो राजनैतिक पार्टी भाजपा से संपर्क में जरूर रहते हैं लेकिन वो पार्टी के फैसले में हस्तकक्षेप नहीं करते हैं। इसलिए उन्हें सियासी दांव खेलने नहीं आते है।
अब एक तरफ अन्ना हैं तो दूसरी तरफ मोहन भागवत। दोनों ही अनुकरणीय व्यक्ति हैं, ऐसे में यह तय करना बहुत मुश्किल हो गया है कि दोनों में से किसकी बात में सच्चाई है। क्योंकि इतना तो तय है कि अन्ना आंदोलन और आरएसएस का साथ, इस प्रश्न का उत्तर केवल एक ही होगा, या तो हां या तो ना, यानी की या तो अन्ना सही या भागवत सही? दोनों तो सही नहीं हो सकते हैं? सवाल यह भी उठता है कि आखिर दोनों में से झूठ कौन बोल रहा है? और क्यों? इस बात के पीछे मंशा क्या है?
गौरतलब है कि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अन्ना हजारे से पुराने गहरे रिश्ता होने की बात कही है। कोलकाता में स्वयंसेवकों की एक रैली को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि संघ ने ही अन्ना हजारे को भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन शुरू करने के लिए कहा था। उन्होंने यह भी कहा कि अन्ना हजारे ने स्वयसेवकों को ट्रेनिंग भी दी थी। रामलीला मैदान में जब अन्ना हजारे सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू किए हुए थे उस समय संघ के हजारों स्वयंसेवक वहां मौजूद थे।
यहां आपको बता दें कि कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कई बार कहा है कि अन्ना हजारे को संघ और भाजपा का समर्थन हासिल है। लेकिन हमेशा अन्ना की ओर से इस बात से इंकार किया गया है।
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