एक लीटर पेट्रोल 68.64 रुपये, उसमें 27.26 रुपये टैक्स

इसमें से टैक्स और ड्यूटी के रूप में 27.26 रुपये केंद्र और राज्य सरकार के खजाने में जाते हैं। बंगाल , महाराष्ट्र जैसे राज्यों में तो राज्य सरकार केंद्र से ज्यादा टैक्स वसूलती हैं। सच तो यह है कि राजस्व का यह बहुत बड़ा साधन है। कोई भी सरकार इसे छोड़ना नहीं चाहती। तेल कंपनियों ने पिछले हफ्ते पेट्रो मूल्य में 1.80 रुपये की वृद्धि कर दी थी जिसका देश भर में विरोध हो रहा है। कंपनियों का कहना है कि रुपये के मूल्य में कमी आने से तेल का आयात महंगा हुआ है। इस साल कच्चे तेल की औसत कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल है। एक बैरल में 159 लीटर होते हैं। ऐसे में कच्चे तेल की कीमत 33 रुपये प्रति लीटर के आसपास बैठती है। अगर तेल को साफ करने (रिफाइनिंग कॉस्ट) पर होने वाले खर्च को जोड़ दिया जाए तो एक लीटर पेट्रोल की कीमत 41.38 रुपये होती है। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकारें इस पर 40 फीसदी टैक्स और शुल्क लेती हैं।
पेट्रोल का बेस प्राइस 41.38 रुपये है। इस पर 1.04 रुपये कस्टम ड्यूटी लगती है जबकि केंद्र सरकार ड्यूटी के तौर पर 14.78 रुपये वसूलती है। वहीं, दिल्ली सरकार 20 फीसदी वैट के रूप में 11.44 रुपये लेती है। इससे दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 68.64 रुपये बैठती है। दिल्ली के मुकाबले वाशिंगटन, न्यूयॉर्क, कराची, ढाका, बीजिंग और कोलंबो में पेट्रोल की कीमतें काफी कम हैं।












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