उत्तर प्रदेश पहुंचे साईबेरियाई पक्षी

विदेशों से आये मेहमान पक्षी समूह ने जलाशयों के अतिरिक्त छोटे-बड़े तालाबों में जलक्रीड़ा कर पर्यटकों को लुभाना शुरू कर दिया है। ठंड की दस्तक के साथ ही साइबेरिया में जबरदस्त बर्फबारी होने और बर्फ के जमने के कारण वहां पक्षियों को भोज्य पदार्थ का अकाल पडऩे लगता है। आहार की खोज में यह पक्षी अपने देश से यहां आते हैं। इन दिनों दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों में नीलसर, लालसर, सीकपर, कामनटूथ पिन्टेल, सलही, वारनकटा, धारीदार सवन, सवन, ठेकरी, पनकौवा, पनडुब्बी, चमचा, सिलही, रिनघुर, कालासिर, बाजा, जलपीपी, सिहो, जांघिल और खीमा शामिल है।
पक्षियों के जमावड़े ने अपनी मृदु किलकारियों से समूचे वनक्षेत्र को मनमोहक और सुरीला बना दिया है। आसपास के इलाकों में पर्यटकों की आमद बढऩे से वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी प्रफुल्लित है। यहां कई यूरोपीय व एशियाई देशों के विदेशी प्रवासी पक्षियों की आमद के साथ ही अफगानिस्तान से आये हईट बैक्टेल पक्षी का आगमन आश्चर्य का विषय बना हुआ है। हईट बैक्टल पक्षी आमतौर पर जनवरी में आता है लेकिन इसकी आमद इसी माह हो गयी है।
यह लुभावने पक्षी लौटते समय रास्ते में प्रजनन भी करते है। पक्षी विहार में विदेशी पक्षियों की आमद के अतिरिक्त जलाशय में ट्रायीनलिडे, जियोमाइडिडे, विषविहीन मन्द विषाक्त सर्प की प्रजातियां, गिरगिट व छिपकली विषाक्त सर्प की प्रजातियां और कई प्रकार की रंगीन मछलियां अपनी निराली अटखेलियों से पर्यटकों को मोहित कर आकर्षित कर रही है। इनमें कवई, मांगुर, सौल, चीतल, डैनी और रोहू मछलियां प्रमुख हैं, जिनकी जलक्रीड़ा पर्यटकों को खासा लुभाती है। वहीं चित्तीदार काला काठा, पचेड़ा, सुन्दरी, कटहवा, तिलकधारी व चरपहिया कछुओं के साथ करैत, कामनकैट स्नैक, पन्हिया, अजगर, नाग, कामनसेण्ड, बडेन, दोमुहा, धामिन और अलिख किबेक दुर्लभ सांप अपनी अजीबोगरीब हरकतों से पर्यटकों का आकर्षण का केन्द्र हैं।












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