रामबिलास पासवान का दामन छोड़ शाबिर नीतीश संग

एक संवाददाता सम्मेलन में लोजपा से अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए अली ने कहा, मुस्लिम समुदाय ने लोजपा और उसके नेताओं में अपना विश्वास खो दिया है। उन्होंने जैसे वादे किए वैसा काम कभी नहीं किया। पार्टी उनके और उनके परिवार द्वारा एक निजी कंपनी की तरह चलाई जा रही है। अली के इस्तीफे के बाद अब राज्यसभा और बिहार विधानसभा में लोजपा के एक-एक सदस्य हैं। लोकसभा में पार्टी का कोई सदस्य नहीं है।
पिछले साल आम चुनावों में हारने के बाद पासवान राजद की मदद से राज्यसभा के सदस्य बनने में कामयाब रहे थे। बिहार विधानसभा में लोजपा के इकलौते सदस्य हैं जाकिर हुसैन खान। लालू प्रसाद यादव की पार्टी राजद के साथ मिलकर बिहार की सत्ता में वापसी का दावा करने वाली लोजपा का एक भी सदस्य बिहार विधान परिषद में नहीं है। जून में विधान परिषद में इसके तीनों सदस्यों ने पार्टी से इस्तीफा देकर सत्तारूढ़ दल जद (यू) का दामन थाम लिया था।
मुसलमानों के मुद्दों को उठाने में अव्वल लोजपा ने वक्त-वक्त पर अपने अल्पसंख्यक नेताओं को गंवाया है। इससे पहले पार्टी के राज्य अध्यक्ष गुलाम रसूल बिलियावी और पूर्व विधायक इजहार अहमद ने लोजपा का साथ छोड़ दिया था। अली के इस्तीफे के बाद स्वयं को मजबूत दिखाने की कोशिश करते हुए पासवान ने कहा कि उनके इस्तीफे से मुस्लिम समुदाय में लोजपा की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आएगी।
पासवान ने बताया कि उन्होंने पार्टी छोड़ने की अपनी योजना बिल्कुल साफ कर दी थी और हम भी जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान चाहते थे। ऐसी चीजें मुस्लिम समुदाय में हमारे जनाधार को कभी नुकसान नहीं पहुंचा सकती हैं। पार्टी से मुस्लिम नेताओं के छोड़कर जाने की बात पर उन्होंने कहा कि पार्टी नेताओं को बनाती है, नेता पार्टी को नहीं। इससे पार्टी पर कोई असर नहीं होगा।












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