ईद से पहले सोडा पिलाकर बड़े किए जा रहे बकरे

बकरे को पकड़कर जबरन उसे यह पदार्थ पिला देने से उसका पेट फूल जाता है। इससे ग्राहकों को ऐसा प्रतीत होता है कि बकरा ताजा और सेहतमंद है। दिल्ली देहात से आने वाले बकरों की सेहत की जांच भी नहीं होती है। जबकि गाजीपुर में इसकी व्यवस्था की जाती है। फतेहपुरी मसजिद के शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम कहते हैं कि यह धोखा है। कुर्बानी का समय आने के साथ ही दिल्ली में दलाल सक्रिय हो जाते हैं। उन पर पाबंदी होनी चाहिए और गांव-देहात से आने वाले बकरे की जांच होनी चाहिए। कुर्बानी देने वालों को जानवरों से प्रेम रखने की आवश्यकता है।
जानवरों के साथ अन्याय हो रहा है। धोखे से सौदा बेचकर आमदनी करना हराम है। इसे बेचने से इबादत कबूल नहीं होती और इमान खतरे में पड़ जाता है।जमीयत उलेमा हिंद के मीडिया इंचार्ज अजीमुल्ला कासमी ने कहा कि बकरे का दाम ज्यादा करने के लिए अल्लाह से जुड़ी कई चीजें बकरे पर गुदवा दी जा रही हैं। आमीर और शाहरूख बकरे को ज्यादा कीमत पर बेचने का प्रचलन हो गया है। जबकि इसका इस्लाम में कोई अहमियत नहीं है। बकरे को इंजेक्शन देकर तगड़ा किया जाना नाजायज है। इसे जल्द से जल्द बंद कराना होगा।












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