अहमदाबाद में आरटीआई कार्यकर्ता की चाकू से गोदगर हत्या

हत्या की वजह अभी तक पता नहीं चल पाई है। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि अभी यह पता लगाया जा रहा है कि यह हत्या आपसी रंजिश की वजह से की गई है या किसी और वजह से। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी कुछ लोगों से रंजिश भी चल रही थी। पुलिस ने बताया कि वे इस केस के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
हत्या के 3 पेंच जिनमें उलझी कहानी
आरटीआई कार्यकर्ता की हत्या में पुलिस 3 मामलों में जांच कर रही है। सबसे पहली कि उनकी हत्या आरटीआई की वजह से तो नहीं की गई है। दूसरा और अहम पहलू यह है कि वे 2002 के गुजरात दंगों के दौरान हुए नरोदा पाटिया दंगों के मुख्य गवाह थे। पुलिस को शक है कि कहीं सुबूतों को मिटाने के लिए तो उनकी हत्या नहीं की गई है। इसके अलावा पुलिस इस मामले में भी जांच कर रही है कि नदीम की उनके मोहल्ले के कुछ कसाईयों से भी दुश्मनी थी। उसने कसाईयों की शिकायत पुलिस से की थी। जिस वजह से उनमें रंजिश चल रही थी।
वैसे यह पहला मौका नहीं है जब गुजरात के अहमदाबाद में आरटीआई कार्यकर्ता की हत्या की गई हो। इससे पहले भी अमित जेठवा नाम के एक कार्यकर्ता की हत्या बीजेपी सांसद के ही भतीजे ने की थी। उस मामले में तो आरोपी को जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया गया था। पुलिस को इस केस में दंगों में गवाह वाले सुराग पर ज्यादा शक है। फिलहाल नरेंद्र मोदी के विकास के शासन में जुर्म भी अपनी दस्तक दे रहा है।












Click it and Unblock the Notifications