पार्टी के चिन्ह पर होंगे यूपी में निकाय चुनाव

सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 18 जून 2010 को नगर निकायों के चुनाव राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्हों पर नहीं कराये जाने की अधिसूचना जारी की थी। सरकारी फरमान पर कई लोगों ने तथा राजनैतिक दलों ने आपत्ति की थी। दलों की आपत्तियों के बाद मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चला गया। न्यायालय ने पांच मई 2011 को आदेश निरस्त करने के निर्देश दिए।
राज्य सरकार उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय गई थी, लेकिन वहां से कोई स्थगन आदेश नहीं मिला। अभी सरकार मामले को लेकर नयी रणनीति बना पाती कि इसी बीच इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राज्य निर्वाचन आयोग को नगर निकाय चुनाव कराने के लिए 31 अक्टूबर तक अधिसूचना जारी करने के आदेश दे दिये।
सिंह ने कहा कि कानूनी दांव पेंचों में चुनाव के लिए अधिसूचना जारी नहीं हो सकी लेकिन चुनाव चिन्हों के बारे में अधिसूचना जारी कर दी गयी। इस अधिसूचना के तहत राजनीतिक दल अपने चुनाव चिन्ह पर उम्मीदवार खड़ा कर सकेंगे। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और भारतीय जनता पार्टी समेत 14 मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल हैं, जिनके उम्मीदवार अपनी-अपनी पार्टी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ सकेंगे।
15 ऐसे दल है जिनकी मान्यता तो नहीं है लेकिन वह आयोग में पंजीकृत हैं। इनके उम्मीदवारों के लिए 15 प्रतीक चिन्ह आरक्षित किये गये हैं। उन्होंने बताया कि इसके अलावा निर्दलीय सभासदों के लिए 75 और नगर पालिका परिषदों, पंचायतों और नगर निगमों के अध्यक्ष या मेयरों का चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लडऩे वाले उम्मीदवारों के लिए 50 चुनाव चिन्ह आरक्षित किये गए हैं।












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