फरवरी तक अंधेरे में डूबा रहेगा ताज महल

आगरा में बिजली वितरण का जिम्मा टोरंट पावर कम्पनी को सौंपा गया तो पावर कारपोरेशन ने उम्मीद जतायी थी कि उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और विभाग की राजस्व वसूली भी बढ़ेगी। अप्रैल 2010 में बिजली के इस निजीकरण के बाद शहर समस्याएं कम होने की बजाय बढ़ गयीं। कम्पनी को व्यवस्था सौंपते हुए यह कहा गया था कि ताज ट्रैपेजियम जोन में निर्वाध विद्युत आपूॢत हो लेकिन ऐसा हो नहीं सका।
उधर उच्चतम न्यायालय भी पूर्व में यह आदेश दे चुका है कि ताजनगरी में बिजली की समस्या न रहे लेकिन गुजरात में बेहतर काम का दावा करने वाली टोरंट पावर कम्पनी यहां फ्लाप साबित हो रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि ताजनगरी घंटो अंधेरे में डूबी रहती है और कई बार ताजमहल की भी बिजली कट जाती है। टोरंट आधिकारियों के अनुसार शहर में विद्युत आपूर्ति के लिये राज्य सरकार जिम्मेवार है।
अधिकारियों का कहना है कि आगरा में प्रतिदिन 350 मेगावाट बिजली की आवश्यकता है जबकि जिले को मात्र 250 मेगावाट बिजली ही मिल रही है। लोगों का कहना है कि आगरा शहर पिछले एक महीने से 12 घंटे बिजली कटौती झेल रहा है ओवर लोङ्क्षडग के नाम पर जनता से खिलवाड़ किया जा रहा है। उपभोक्ता बिजली संकट से आजिज आ चुके हैं। अघोषित बिजली कटौती के चलते शहर का उद्योग तथा जलापूॢत बुरी तरह प्रभावित है। व्यापारियों ने टोरंट कम्पनी को व्यवस्था सुधार लेने की चेतावनी भी दे दी है।
ज्ञात हो कि टोरंट ने पिछले महीने घोषणा की थी कि ङ्क्षसकदरा सब स्टेशन पर 100 एमबीए का ट्रांसफार्मर लग जाने के बाद आपूर्ति बेहतर हो जाएगी, लेकिन ट्रांसमिशन कम्पनी का फरमान जारी हो गया है ग्रामीण क्षेत्रों में गेहूं की बुवाई और सीजन के चलते बिजली कटौती नहीं की जायेगी इसलिये ट्रांसफार्मर फरवरी माह में बदला जायेगा। फिलहाल ताजनगरी की समस्या दूर होती नजर नहीं आती।












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