टेबलेट पर होगी जातिय जनगणना, दिल्ली से शुरुआत

दिल्ली में नवंबर के दूसरे पखवाड़े से गणना शुरू होगी। जनगणना या अन्य सरकारी कार्यों की तरह इस बार शिक्षकों की ड्यूटी इसमें नहीं लगेगी। सरकारी कर्मचारी (राज्य, केंद्र या स्थानीय निकाय) ड्यूटी में लगाए जाएंगे, जल्द ही मसले पर दिल्ली सरकार आदेश पारित करेगी। जनगणना निदेशालय अधिकारियों के अनुसार, प्रत्येक गणनाकार को 4 ब्लॉक दिए जाएंगे जिसे 10 दिन में पूरा करना होगा। जातिगत गणना 1931 के बाद अब की जा रही है इसलिए शहरी और ग्रामीण स्तर पर एससी/एसटी के अलावा अलग-अलग जातियों की संख्या सामने आएगी। केंद्र सरकार ने यह जिम्मेदारी राजस्व विभाग (मंडलायुक्त) को सौंपी है। आर्थिक स्तर की जानकारी और जातियों का पता लगाने के लिए प्रश्नावली भी ऑनलाइन मिलेगी जिससे पूछकर ऑनलाइन ही जवाब भरे जाएंगे। गणनाकार टेबलेट पीसी पर डिजिटल सिग्नेचर करके सील लगाएगा। जनगणना 2011 में 33,340 गणनाकार के अलावा 5557 सुपरवाइजर और 343 इंचार्ज लगाए गए थे।
दिल्ली की आबादी 167.53 लाख है। इनकी जातीय और आर्थिक स्तर की गणना 40 दिन में करने का लक्ष्य रखा गया है। दिल्ली की जनगणना निदेशक (आपरेंशंस) वर्षा जोशी का कहना है कि जातीय गणना और आर्थिक स्तर की गणना करने वालों को प्रशिक्षण देने का काम निदेशालय करेगा। आधुनिक तरीके से टेबलेट पीसी पर ऑनलाइन उत्तर भरने से गलती के चांस कम रहेंगे और डाटा एंट्री में बर्बाद होने वाला समय बचेगा। इस गणना में शिक्षकों को ड्यूटी से राहत दी जा रही है। इसके लिए टेबलेट पीसी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (भेल) बना रही है, ऑपरेटर भी उन्हीं के होंगे। जल्द ही इसे देश के अन्य भागों में इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार ने तय कर लिया है कि भविष्य सभी तरह की जनगणना टेबलेट पर ही की जाएगी।












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