शीतकालीन सत्र में सिटीजन चार्टर बिल लाने की तैयारी

टीम अन्ना के जन लोकपाल के सामांन्तर केंद्र सरकार ने आरटीआई की तर्ज पर जनता के शिकायत निवारण अधिकारों से संबंधित नया कानून लाने की घोषणा की है। सरकार ने सभी मंत्रालयों और विभागों के लिए जनता की शिकायतें दूर करने के लिए 15 दिन की समय सीमा तय की है। नियत समयसीमा में काम पूरा न होने पर संबंधित विभाग के अधिकारी-कर्मचारी को दंड के प्रावधान वाले इस सख्त कानून को पेश कर सरकार ने साफ कर दिया है कि यह कानून लोकपाल कानून से ज्यादा प्रभावी और जनता के हितों से सीधे जुड़ा है।
इससे न सिर्फ अवाम की समस्याओं का त्वरित और प्रभावी समाधान हो सकेगा, बल्कि केंद्र व राज्यों के स्तर पर नई नौकरियों के रास्ते भी खुलेंगे। नागरिक अधिकार शिकायत निवारण विधेयक, 2011 का मसौदा सरकार ने बुधवार को सार्वजनिक बहस के लिए जारी कर दिया। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा प्रदान की जाने वाली सभी सार्वजनिक सेवाओं को शामिल किया जा रहा है। जबकि जनता को समय पर सेवा उपलब्ध नहीं कराने पर दंड का भी प्रावधान किया गया है। इसके जरिए किसी भी सेवा से संबंधित जनता की शिकायतों का समयबद्ध निवारण किया जा सकेगा।
पुलिस सेवाएं भी इस कानून के दायरे में आएंगी। मसौदे को कार्मिक मंत्रालय की वेबसाइट पर डाल कर जनता से इस पर राय मांगी गई है। इस राय के आधार पर ही विधेयक तैयार किया जाएगा, जिसे कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। मसौदा सार्वजनिक करते हुए केंद्रीय कार्मिक मंत्री वी. नारायणसामी ने कहा कि ऐसा पहली बार हो रहा है कि सरकार कोई कानून बनाने से पहले ही जनता से राय ले रही है। चूंकि यह जनता के अधिकारों से जुड़ा हुआ कानून है, इसलिए सरकार पहले ही जनता की राय लेना चाहती है।












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