अब नहीं होगी बरसात की भविष्यवाणी

देश में वर्षा मापने के लिए अंग्रेजी प्रणाली प्रचलित थी। इस प्रणाली के तहत तहसील कार्यालय की सबसे ऊपरी मंजिल पर सिलेण्डर शेप के दो बर्तन रख दिए जाते थे। बर्तन में जमा होने वाले पानी को एक बोतल में निकाल लिया जाता और स्केल की मदद से बरसात का अनुमान लगाया जाता। बरसात के संबंध में तहसील कर्मियों को सुबह 8 बजे रिपोर्ट जिला कार्यालय में प्रेषित करने के आदेश पारित थे। आदेशों की पालन के लिए बरसात आने पर कर्मचारी को कार्यालय की ओर दौड़ पड़ते थे। चूंकि बरसात में बर्तन भरने के कारण सही अनुमान लगाना कठिन हो जाता था। बरसात का सही अनुमान लगाने के लिए पिछले दिनों भारत सरकार तथा कोरियाई कंपनी जिन जांग में समझौता हुआ। सरकार ने कंपनी को पूरे देश की विभिन्न तहसीलों में स्वचलित वर्षा मापक यंत्र लगाने का ठेका दिया। जिनका संपर्क पूना में स्थापित मौसम विभाग के हैडक्वार्टर से होगा।
स्वचलित वर्षा मापक यंत्र 5 मी. चौड़ा तथा 7 मी. लम्बा होता है। स्टेशन स्थापित होने के बाद सुरक्षा की दृष्टि से इसके चारों ओर लोहे की झाली लगाई जाती है। स्टेशन के ऊपर टॉवर स्थापित होता है। वर्षा की बूंद टॉवर पर गिरती हैं। सटेलाईट सिस्टम के जरिए प्रत्येक स्टेशन का डाटा पूना में अपडेट होगा। जिन यांग कंपनी के मैनेजर (लेफ्ट) सुधीर कुमार ने बताया कि भारत सरकार ने उनकी कंपनी के साथ 55 लाख 26 हजार 400 यूएस डॉलर में पूरे भारत की 1350 तहसीलों में स्वचलित वर्षा मापक स्टेशन स्थापित करने का करार किया है। इनमें से कुछ तहसीलों पर सेंसर भी लगाए जाएंगे। सेंसर की मदद से तापमान तथा नमी का पता चलेगा। देश की 1350 तहसीलों में लगभग 400 स्टेशनों पर सेंसर स्थापित किए जा रहे हैं।
मैनेजर के अनुसार उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, उडीसा, गोवा की तहसीलें स्वचलित वर्षा मापक यंत्र से लैस हो गई हैं। वहीं गुजरात में कार्य आखिरी दौर में चल रहा है। हरियाणा की कुल 71 तहसीलों में से 36 तहसीलों में सोमवार से स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। इनमें से 14 तहसीलों पर सेंसर स्थापित करने की व्यवस्था की गई है। दो दो सप्ताह के भीतर कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। देश के सभी स्टेशन पूना स्थित हैड क्वार्टर से जुड़ें होंगे। वर्षा के संबंध में 60 मिनट बाद खुद-ब-खुद डाटा अपडेट होता रहेगा।
सिरसा, डबवाली के उपमण्डलाधीश डॉ. मुनीश नागपाल ने बताया कि डबवाली को साल 1969 में तहसील का दर्जा प्राप्त हुआ था। उसी समय से बरसात मापने के लिए स्पैशल कर्मचारी नियुक्त किए गए थे। बरसात में भीगते हुए कर्मचारी को कार्यालय पहुंचना पड़ता था। लेकिन स्वचलित वर्षा मापक यंत्र स्थापित होने से काफी मदद मिलेगी। कंपनी के अधिकारियों ने बताया है कि हरियाणा की 36 तहसीलों में इस प्रकार के स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं।












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