रस्मों रिवाज के साथ सैफ अली खां बने पटौदी के नये नवाब

मालूम हो परंपरा के अनुसार मंसूर अली खान पटौदी उर्फ टाइगर पटौदी के निधन के बाद उनके बेटे सैफ को ही यह दर्जा मिलना था। बताते चलें कि इससे पूर्व मंसूर अली खान पटौदी नवाब थे मगर आज से 40 दिन पूर्व एक लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया था। आज मंसूर अली खान पटौदी का चालीसवां भी था और आज के दिन ही सादगीपूर्ण तरीके से छोटे नवाब को उनके पिता की विरासत सौंप दी गई और उन्हें बड़े नवाब का दर्जा दे दिया गया।
पटौदी गांव में संपन्न हुए इस समारोह में सैफ का पूरा परिवार मौजूद था। उनकी मां शर्मिला टैगोर ने पगड़ी पहनाए जाने के बाद सैफ का माथा चूमा और उन्हें बधांईयां दी। पगड़ी समारोह समाप्त होने के बाद सैफ अली खां ने कहा कि वह इस अमूल्य दर्जे के लिये सभी का शुक्रिया करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पटौदी का नाम तो पूरी दुनिया में उनके अब्बा ने ही रौशन किया। इस समारोह में मौजूद सैफ की बहन सोहा और सबा ने टाइगी पटौदी की आत्मा की शांती के लिसे दुआ भी की।
टाइगर और नवाब टाइटल के हकदार सिर्फ अब्बा हैं
सैफ अली खां ने कहा कि वो रस्म के तौर पर पगड़ी तो पहन लेंगे लेकिन नाबन का टाइटल स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि वह नवाब कहलाने की उपाधि अपने अब्बा के पास ही रहने देना चाहते हैं। अब इसके मुताबिक नवाब की उपाधि मरनोप्रांत भी सैफ के पिता नवाब मंसूर अली खान पटौदी के पास ही रहेगी। गौरतलब है कि सैफ के पिता स्वर्गीय मंसूर अली खान पटौदी की मां भोपाल के अंतिम नवाब हमीदुल्लाह खान की बेटी थी। मंसूर अली खान का जन्म भोपाल में ही हुआ था और वो ओकाफ ए शाही के मुतवल्ली थे।












Click it and Unblock the Notifications