किसी दबाव में नहीं झुकेगी यूपीए सरकार: सलमान खुर्शीद

संसद के शीतकालीन सत्र में वहीं बिल पारित होगा जो सर्वमान्य तथा न्यायपालिका के प्रति जवाबदेह हो। खुर्शीद ने कहा कि सरकार लोकपाल विधेयक पारित कराने में किसी व्यक्ति या संस्था का दबाव नहीं मानेगी। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि संसद के आगामी सत्र में एक मजबूत लोकपाल विधेयक पेश किया जायेगा।
उन्होंने कहा कि विश्वास है कि संसद उस पर चर्चा कर पारित करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि लोकपाल न्यायपालिका की तरह काम करे और उसका संवैधानिक ढांचा हो। लोकपाल की तैनाती को लेकर उन्होंने एक और कैटेगरी बनाने का प्रयास किया कि लोपाल सिर्फ बड़े घोटालों की ही जांच करे। मध्यम और छोटे घोटालों व कर्मचारियों अधिकारियों की जांच मुख्य सर्तकता आयुक्त द्वारा करायी जाए।
खुर्शीद ने कहा कि न्यायपालिका लोकपाल के दायरे में नहीं रखी जाएगी। न्यायपालिका को पाक साफ बनाये रखने के लिए सरकार लोकपाल विधेयक के साथ ही नयायपालिका जवाबदेही विधेयक भी पेश करेगी। गांधीवादी उन्होंने कहा कि कुछ लोग चाहते हैं लोकपाल को ही सारा अधिकार दे दिया जाय और वही प्रत्येक मामलों की जांच करे। लोकपाल की मांग को फंसाने के लिए उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक देश में पूरी ताकत एक ही व्यक्ति या संस्था को कैसे दी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि निर्वाचन आयोग और न्यायालय की तरह लोकपाल भी संवैधानिक संस्था बने। प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने के सवाल पर वह कन्नी काटते हुए कहा कि कुछ बातें यदि संसद के भीतर रखा जाए तो बेहतर होता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में लोकपाल, मुख्य सतर्कता आयुक्त और केन्द्रीय जांच ब्यूरो के अधिकारों को परिभाषित किया जायेगा।
लोकपाल को किसी मामले की जांच का स्वाधिकार भी होगा। अन्ना टीम के प्रमुख सदस्य अरविन्द केजरीवाल के संसद से ऊपर जनता संबंधी बयान से उन्होंने असहमति जताई और कहा कि यह पूरी तरह सत्य नही है। उन्होंने काह कि संसद में कानून बनाने का अधिकार जनता को नही है संवैधानिक सुधार जनता के बजाय संसद ही करती है।












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