18 महीने में तेरहवीं बार रिजर्व बैंक ने बढ़ाईं ब्याज दरें, लोन फिर महंगे

भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को अपनी नीतिगत दरों में बढ़ोतरी करते हुए बाजार में हड़कंप मचा दिया है। इससे एक तरफ जहां होमलोन, ऑटोलोन, पर्सनल लोन आदि की ईएमआई बढ़ जायेगी, वहीं बचत खाते में ज्यादा ब्याज मिलने की उम्मीद है। हालांकि ऐसा आरबीआई ने अचानक नहीं किया है, बाजार विशेषज्ञों ने ऐसा अनुमान पहले ही लगाया था।
आरबीआई ने रेपो दर को 0.25 प्रतिशत यानी 25 अंक बढ़ा कर 8.50 प्रतिशत कर दी है। रेपो दर वह ब्याज दर है जिस पर कोई कारोबारी बैंक आरबीआई से बेहद छोटी अवधि के कर्ज लेता है। इसी तरह रिवर्स रेपो दर को भी 0.25 प्रतिशत अंक बढ़ा कर 7.50 प्रतिशत कर दिया गया है। रिवर्स रेपो वह दर है, जो कारोबारी बैंकों को अपना पैसा आरबीआई के पास बेहद छोटी अवधि के लिए जमा कराने पर मिलता है।
हालांकि इस बार आरबीआई ने सीआरआर में कोई परिवर्तन नहीं किया है। यह पहले की तरह 6 प्रतिशत है। आरबीआई का मानना है कि महँगाई कम करने के लिए सप्लाई बढ़ाने पर जोर देना होगा। अगर दिसंबर के बाद महँगाई काबू में आयी, तो दरें आगे बढ़ाने की जरूरत नहीं होगी।
आरबीआई का कहना है कि ब्याज दरों को बढाने से महंगाई पर इसका खासा प्रभाव पडेगा। और मंहगाई पीछले साल से भी कम हो जाएगी। विशेषज्ञ व्याज दरों की बढोत्तरी पर एक राय नहीं हो पा रहे हैं। कुछ लोगो का कहना है कि होम लोन, आटो लोन और पर्सनल लोन के व्याज दर बढ़ जाने से लोग लोन कम लेंगे। लोन कम लेने से लोगो की जरूरतो में भी कमी आएगी, जिससे उत्पादों की डिमांड कम होगी और डिमांड कम होन से उनके आसमान चढ़ते मूल्य नीचे गिर सकते हैं। और इससे बाजार भाव पर खासा असर पड़ेगा।












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