हिज्बुल ने कराया विस्फोट, वसीम भेजा गया तिहाड़

सात सितंबर को हुए विस्फोट में 15 लोगों की मौत हो गई थी और काफी घायल हुए थे मलिक की पुलिस हिरासत खत्म होने पर उसे पटियाला हाउस स्थित एनआईए के विशेष न्यायाधीश एचएस शर्मा के सामने पेश किया गया। जांच अधिकारी ने बताया कि अभियुक्त से पूछताछ हो चुकी है और मामले की जांच चल रही है अत: उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जाए। अदालत ने आग्रह को स्वीकार कर मलिक को आठ नवंबर तक तिहाड़ भेज दिया। वहीं अदालत ने देव की न्यायिक हिरासत अवधि बढ़ा दी।
मलिक 17 दिनों तक एनआईए की हिरासत में रहा। जम्मू-कश्मीर का रहनेवाला और बांग्लादेश में यूनानी चिकित्सा की पढ़ाई करने वाले मलिक को जांचकर्ताओं ने उच्च न्यायालय के गेट संख्या पांच के बाहर हुए विस्फोट में मुख्य कड़ी करार दिया है। विस्फोट में 15 लोगों की मौत हो गई थी और काफी घायल हुए थे। इससे पहले एनआईए ने मलिक की हिरासत इस आधार पर मांगी थी कि कुछ प्रगति हो रही है और मामले से जुड़े और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है। एनआईए ने मलिक के जम्मू और किश्तवाड़ आवास से तीन मोबाइल फोन भी बरामद किए थे। इससे पहले मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने बंद कमरे में देव की गवाही दर्ज की थी।
इस गवाही मे आतंकवादी वसीम अकरम मलिक ने अदालत में कहा कि यह विस्फोट इस आंतकी संगठन के सरगना सलाउद्दीन के कहने पर किया गया। सलाउद्दीन इन दिनों पीओके में रह रहा है। साथ ही कहा कि जहांगीर नाम का हिज्बुल का आतंकवादी भी इस हमले को कराने की साजिश में शामिल था।












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