ग्‍लेशियर के साथ पिघल सकती है चीन की आर्थिक व्‍यवस्‍था

glacier
पेरिस। वैश्विक तापमान में बढोतरी से चीन के हिमालय स्थित ग्लेशियर पिघल रहे हैं। इससे आवास, पर्यटन और आर्थिक विकास पर खतरा उत्पन्न हो रहा है। एक पर्यावरण अनुसंधान पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम चीन के 111 मौसम केंद्रों में से 77 प्रतिशत केंद्रों ने वर्ष 1961 से 2008 के दौरान तापमान में महत्वपूर्ण बढोतरी की ओर इंगित किया है। अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक 4,000 मीटर से अधिक की उंचाई पर स्थित कुल 14 निगरानी केंद्रों ने इस दौरान तापमान में 1.73 डिग्री सेल्सियस की बढोतरी दर्ज की।

यह पिछले दशक में वैश्विक औसत बढोतरी से करीब-करीब दोगुना है। चाइनीज एकेडमी आफ साइसेंस के ली झोगजिंग की अगुवाई में अध्ययनकर्ताओं ने ग्लेशियर में हुए तीन परिवर्तनों की पहचान की है। जो कि भविष्य में चिंता का कारण बन सकता है। कई ग्लेशियर पीछे की ओर खिसक रहे हैं और साथ ही उसकी मात्रा में भी कमी आ रही है। मसलन, पेंगकुआ बेसिन के 999 ग्लेशियर में ही कुल मिलाकर पिछले दो दशकों यानि 1980 से लेकर 2001 के दौरान 131 वर्ग किलोमीटर इलाके में कमी आयी है।

इन परिवर्तनकों का कहीं-कहीं पर व्यापक प्रभाव दिख रहा है। उन्होंने कहा है कि ग्लेशियर पारिस्थितिकी तंत्र का अभिन्न हिस्सा है और मानव आबादी को बरकरार रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। दक्षिण-पश्चिम चीन में 23,488 ग्लेशियर हैं जो कि हिमालय और तांगुला, न्येनकंटांघला, हेंगडुआन की पर्वत श्रृंखलाओं में 29,523 वर्ग किलोमीटर इलाके में फैले हुए हैं।

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