ग्लेशियर के साथ पिघल सकती है चीन की आर्थिक व्यवस्था

यह पिछले दशक में वैश्विक औसत बढोतरी से करीब-करीब दोगुना है। चाइनीज एकेडमी आफ साइसेंस के ली झोगजिंग की अगुवाई में अध्ययनकर्ताओं ने ग्लेशियर में हुए तीन परिवर्तनों की पहचान की है। जो कि भविष्य में चिंता का कारण बन सकता है। कई ग्लेशियर पीछे की ओर खिसक रहे हैं और साथ ही उसकी मात्रा में भी कमी आ रही है। मसलन, पेंगकुआ बेसिन के 999 ग्लेशियर में ही कुल मिलाकर पिछले दो दशकों यानि 1980 से लेकर 2001 के दौरान 131 वर्ग किलोमीटर इलाके में कमी आयी है।
इन परिवर्तनकों का कहीं-कहीं पर व्यापक प्रभाव दिख रहा है। उन्होंने कहा है कि ग्लेशियर पारिस्थितिकी तंत्र का अभिन्न हिस्सा है और मानव आबादी को बरकरार रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। दक्षिण-पश्चिम चीन में 23,488 ग्लेशियर हैं जो कि हिमालय और तांगुला, न्येनकंटांघला, हेंगडुआन की पर्वत श्रृंखलाओं में 29,523 वर्ग किलोमीटर इलाके में फैले हुए हैं।












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