अक्टूबर तक नहीं जारी हो पाएगी निकाय चुनाव की अधिसूचना

जनगणना विभाग को भी आदेशित किया गया था कि 2011 के आधार पर वार्ड के अनुसार जनगणना का पूरा ब्यौरा निर्वाचन आयोग को उपलब्ध करा दिया जाये। वहीं इस स बन्ध में राज्य निर्वाचन की हुई बैठक में कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। सूत्रों का कहना है कि जनगणना विभाग ने 31 अक्टूबर के पहले वार्ड अनुसार जनगणना का पूरा ब्यौरा उपलब्ध नहीं करा पाने के स बंध में न्यायालय को बताने का निर्णय लिया है। माना जा रहा है कि इस स बन्ध में विभाग जल्दी ही पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगा।
गौरतलब है कि नगर निकायों का कार्यकाल नव बर मध्य में समाप्त हो रहा है। जनगणना विभाग से उत्तर प्रदेश के वार्ड अनुसार जनगणना अलग से जल्दी किये जाने के लिए कहा गया है क्योंकि यदि देश के सभी राज्यों की एक साथ जनगणना सामान्य रुप से हुई तो इसके आंकडे मार्च 2013 तक प्रकाशित हो पायेंगे। समय से चुनाव न हो पाने की स्थिति में निर्वाचन आयोग का तर्क है कि आयोग ने चुनाव के लिए गत जून में ही अपनी तैयारियां पूरी कर ली थीं लेकिन उस समय राज्य सरकार ही तैयार नहीं थी।
अक्टूबर-नव बर में चुनाव कराने का प्रस्ताव किया गया तो सरकार ही पीछे हट गयी। मायावती सरकार ने मेयरों और नगर पालिका परिषद के अध्यक्षों के चुनाव सीधे जनता से नहीं कराकर सभासदों के जरिये कराने की कोशिश की थी। राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्ह पर भी यह चुनाव नहीं लड़े जाने का प्रस्ताव था।












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