अलीगढ़ के बाबा संग जियेगी-मरेगी ऑस्‍ट्रेलिया की क्‍लाउंडिया

Australian woman got married with Indian godman
दिल्‍ली (ब्यूरो)। ऑस्‍ट्रेलिया से भारत आयी एक युवती यहां एक बाबा के प्‍यार में ऐसी पागल हुई कि उन्‍हें अपना तन-मन सब दे बैठी। यह कहानी है अलीगढ़ के पास चंडौसा स्थित आश्रम में रहने वाले बाबा बालक दास और क्‍लाउडिया की, जो हाल ही में भारत आयी थी। हाल ही में हुई शादी के बाद दोनों के बीच झगड़ा भी हुआ, लेकिन अब क्‍लाउडिया ने बाबा के साथ यहीं जीने और मरने की कसम खा ली है।

लगभग 10 दिन पहले बाबा बालक दास के संग ब्याह रचाने वाली क्लाउडिया घरेलू विवाद के बाद आश्रम से चली गई थी। आश्रम लौटी क्लाउडिया ने बताया कि वह आश्रम से दिल्ली स्थित आस्ट्रियाई दूतावास चली गई थी। वह अपने वतन लौटने से पहले भारत भ्रमण करना चाहती थी । इसके तहत वह चेन्नई के लिए रवाना हो गई। वहां पर पर्यटन के बाद क्लाउडिया दिल्ली आ गई। इसी बीच बाबा का फोन आ गया। फ‌िर उसने बाबा के पास लौटने का फैसला किया और कहा कि अब यहीं जिएंगे यही मरेंगे।

बाबा ने शर्त रखी है कि क्लाउडिया आश्रम के कामों में भी हाथ बटाएंगी। क्लाउडिया ने कहा है कि वह घर से दूर रहती हैं। बाबा भी मोबाइल फोन से बात करने पर आपत्ति नहीं करेंगे। इसके बाद दोनों पक्ष साथ रहने पर सहमत हो गए। बाबा बालक दास ने कहा है कि उन्होंने घोषणा की थी कि वह क्लाउडिया को लेने नहीं जाएंगे। वह अपनी घोषणा पर अटल रहे। हालांकि क्लाउडिया को फोन पर मनाने की बात स्वीकारते हैं। कहते हैं इतना झुकने में क्या बुराई है। विदेशी कल्चर में पली-बढ़ी क्लाउडिया शिजलर काफी दिनों से भारत में रह रही थी। इसी बीच एक साधू से उसकी नजदीकियां बढ़ी फिर दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया। मगर शादी के बाद बंद आश्रम में क्लाउडिया अपने संस्कार और संस्कृति को नहीं छोड़ पाई, जो बाबा को नागवार गुजरा और दोनों के छह माह के वैवाहिक जीवन में फसाद का कारण बना।

विवाद की सबसे बड़ी वजह पहनावा और मोबाइल फोन था। बाबा चाहते थे कि क्लाउडिया उनके साथ दांपत्य जीवन में भारतीय नारी की तरह रहे, लेकिन क्लाउडिया अपने पहनावे में और अपनी तरह से रहती थी। खाना बनाने और आश्रम की साफ सफाई से भी उसका कोई लेना देना न था। बाबा खुद खाना बनाते। एक बार बाबा ने क्लाउडिया से आरती के लिए दीपक में बाती लगाने की बात कही तो उसने कह दिया कि बाती बनाना नहीं आता।

इसी दिन से बाबा का पारा चढ़ गया। इसके बाद दूसरी समस्या मोबाइल फोन से पैदा हुई। क्लाउडिया अक्सर कहीं बतियाती रहती थी, जो बाबा को अखरता था और वे उसे टोकते थे। इन्हीं तमाम विवादों ने एक दिन झगड़े का रूप धारण कर दिया और क्लाउडिया उन्हें छोड़कर दिल्ली चली गई, जहां से वह अपने देश लौटने की तैयारी कर रही थी। अचानक उसने इरादा बदल दिया। उम्मीद करनी चाहिए अब बाबा के साथ उसका रिश्ता ताउम्र बना रहेगा।

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