धार्मिक संस्थाओं पर हाईकोर्ट ने अपनाया कड़ा रूख

Chandigarh: HC furious over Religious constitutions
चंडीगढ़। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट अब उन धार्मिक संस्थाओं पर कड़ा रूख अपनाया है जोकि हरियाणा व पंजाब से चंडीगढ़ आने वाले प्रेमी जोड़ों से मोटी रकम ऐंठ कर विवाह प्रमाणपत्र जारी करतीं हैं। अदालत ने प्रश्र किया है कि क्या यदि कोई अपने घर में गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश कर दे तो क्या वह धार्मिक विवाह कराने का अधिकारी बन जाता है या कोई अन्य ग्रंथ रख ले तो क्या वह मैरिज प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकारी बन जाता है?

खंडपीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता अनुपम गुप्ता द्वारा दायर उस रिपोर्ट को भी गंभीरता से लिया है, जिसमें कहा गया है कि एक घर में गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश कर यहां के सेक्टर-32 में एक व्यक्ति न केवल धार्मिक विवाह कराकर नवविवाहित जोड़ों को प्रमाणपत्र भी जारी कर देता था। खंडपीठ ने फिलहाल चंडीगढ़ के एक मंदिर व अन्य ऐसे धार्मिक स्थलों को विवाह प्रमाणपत्र जारी करने से रोक दिया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 नवंबर की तारीख तय की है। खंडपीठ ने कुछ अन्य रिहायशी मकानों में भी चल रहे ऐसे गोरखधंधे को रोकने का निर्देश दिया है।

हरियाणा, पंजाब एवं चंडीगढ़ के विरुद्ध दायर याचिका पर सुनवाई के उपरांत खंडपीठ ने कहा कि जो व्यक्ति गुरु ग्रंथ साहिब का घर में ही प्रकाश कर शादियां कराता था, उसने अदालत को आश्वासन दिया था कि वह ऐसा नहीं करेगा, परंतु अब खंडपीठ को मिली जानकारी के अनुसार इस व्यक्ति ने किसी अन्य जगह यह धंधा चलाना शुरू कर दिया है। खंडपीठ ने कहा है कि शादी कराने की इन दुकानों को बंद कराने की आवश्यकता है।

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