सरकार भी ले रही सोशल मिडीया का सहारा

उन्होंने कहा कि इन भारतीय इंटरनेट उपभोक्ताओं में बड़ी संख्या में लोग सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक और माइक्रो ब्लागिंग साइट ट्विटर पर सक्रिय हैं। इसलिये अब सरकार के लिये सोशल मीडिया को नजरअंदाज करना संभव नहीं है। पांडे ने कहा कि हैती का भूकंप, मुंबई की बाढ़ और अन्ना हजारे के आंदोलन कुछ ऐसे उदाहरण हैं जिन्हें आगे बढ़ाने में सोशल नेटवर्किंग साइटों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सोशल मीडिया के कारण दुनियाभर के 72 शहरों में अन्ना हजारे के समर्थन में एक साथ रैली निकाली गई थी। इससे यह संदेश गया कि देश में भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा है।
पीयूष पांडे ने बताया कि सरकार अब यह बात समझ गई है कि इससे जुड़ने में ही समझदारी है। अन्ना हजारे के आंदोलन के दौरान सरकार ने इस बात की बेहद कमी महसूस की कि सोशल मीडिया पर उनका पक्ष रखने वाला कोई नहीं है। कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने भी हाल ही में कहा था कि सरकार ने इस आंदोलन से सोशल मीडिया वेबसाइटों ट्विटर, फेसबुक, यू ट्यूब और ब्लाग की ताकत को समझा है और इससे सबक लिया है। पीयूष पांडे ने कहा कि हजारे के आंदोलन के बाद सरकार के अंदर इस बात को लेकर बेचैनी है कि कैसे सोशल मीडिया पर सरकार का पक्ष रखा जाये। सूचना तकनीक मंत्रालय ने सरकारी विभागों के लिये सोशल मीडिया नीति के बारे में लोगों से सुझाव मांगे थे और इस साल के अंत तक सरकार की सोशल मीडिया नीति आ सकती है।












Click it and Unblock the Notifications