'अगर अन्ना भ्रष्ट तो मनमोहन सिंह भी ईमानदार नहीं'

जरा गौर फरमाइये, जब से सिविल सोसायटी बनीं है तब से ही टीम अन्ना पर वार हो रहा है। सबसे पहले बात शांति भूषण और प्रशांत भूषण की करते हैं जिन्हें कथित रूप से सीडी प्रकरण में फंसाया गया । उसके बाद स्वामी अग्विनेश पर टीम अन्ना से बगावत करने का आरोप लगा, बताया गया कि वो टीम अन्ना में सरकारी एजेंट हैं। फिर आया नंबर अरविंद केजरीवाल का, कहा गया कि उन्होंने अपनी उस कपंनी के पैसे खाये हैं, जहां उन्होंने काम किया था। जब वहां भी दाल नहीं गली तो किरण बेदी पर एयर टिकट की हेरा-फेरी का आरोप लगा दिया गया।
इस प्रकार टीम अन्ना को गलत और भ्रष्ट साबित करके अन्ना हजारे पर अप्रत्यक्ष रूप से वार किया जा रहा है। दबे शब्दों में कहा जाने लगा है कि इस तरह से टीम अन्ना को गलत दिखाकर अन्ना हजारे को भ्रष्टाचारी साबित करने में कुछ अराजक तत्व जुटे हुए हैं। क्योंकि भ्रष्टाचारियों का साथ देने वाला भी भ्रष्ट होता है। इसलिए अगर टीम अन्ना भ्रष्ट है तो अन्ना हजारे भी भ्रष्ट हुए। यह तो हुई टीम अन्ना की बात, अब थोड़ी बात करते हैं सत्ता दल की।
देश को राष्ट्रमंडल खेल घोटाला, आदर्श घोटाला और 2जी स्पैक्ट्रम घोटालों की सौगात देने वाली यूपीए सरकार की जब भी बात होती है तो सरकार की ओर से हमेशा कहा जाता है कि देश में हुए घोटालों के लिए जिम्मेदार लोगों को जरूर सजा मिलेगी। और दिखाने के लिए उनमें से कई लोगों को सजा दे दी भी गयी है।
जैसे की कलमाड़ी और ए राजा को जेल भेज दिया गया। अशोक चव्हाण को कुर्सी छोड़नी पड़ी लेकिन इन सारी बातों के लिए देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने कोई भी गलत काम नहीं किया है, वो ईमानदार छवि के मालिक है। लेकिन जब अन्ना टीम के भ्रष्टाचारी होने पर अन्ना भ्रष्ट हो सकते हैं तो पीएम की टीम भ्रष्ट होने पर मनमोहन सिंह क्यों ईमानदार बने हुए हैं? इसका जवाब देश की जनता सरकार से मांग रही है। आखिर यह कैसे मान लिया जाये कि देश में हो रहे घोटालों की भनक पीएम साहब को नहीं थी। आखिर उनके हाथ में देश की बागडोर हैं, वो इस कदर लापरवाह कैसे हो सकते हैं?
इसलिए जनता ने फेसबुक और टि्वटर पर लिखकर जवाब मांगा है कि या तो सरकार आज से मनमोहन सिंह को ईमानदार कहना बंद कर दें या फिर वो अन्ना टीम की बदनामी करना छोड़ दें। सरकारी महकमें में काम करने वाले कर्मचारी बनारस के गिरधर चौधरी ने लिखा है कि आज अन्ना और अन्ना टीम का आंदोलन बहुत आगे निकल चुका है, कहीं ना कहीं लोग इस आंदोलन से पूरी तरह जुड़ चुके हैं, चाहे इसके पीछे अन्ना प्रेम हो या भ्रष्टाचार से मुक्ति लेकिन सच यही है कि देश की जनता आज भ्रष्टाचार के दीमक के निजात चाहती हैं।
अगर वाकई में कुछ लोग ये सोचते हैं कि अन्ना के आंदोलन और अन्ना की टीम को तोड़ने से ये लड़ाई खत्म हो जायेगी तो शायद वो गलत हैं क्योंकि आप एक टीम को तोड़ सकते हैं, एक अन्ना की आवाज दबा सकते हैं लेकिन भारत में तो घर-घर में अन्ना हैं, इसलिए वो कितनों को भ्रष्ट साबित करेगें।












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