मारूति गई तो बर्बाद हो जाएंगे गुडग़ांव और फरीदाबाद

इसलिए कंपनी तेजी से गुजरात में जमीन लेने पर काम कर रही है। वह वहां 18,000 करोड़ रुपए निवेश करने जा रही है। इस सिलसिले में गुजरात के मुख्य मंत्री नरेन्द्र मोदी से मारुति के टॉप मैनेजमेंट ने मुलाकात करके वहां निवेश का मन बनाया है। 29 अक्टूबर को कंपनी के बोर्ड की बैठक होने वाली है जिसमें इस पर फैसला होना है लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि अब कंपनी मानेसर से मुक्ति पाने की जुगत में है।
वेंडरों एवं विभिन्न औद्योगिक संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि इस विवाद से आजिज आकर मारुति यहां से कहीं और गई तो गुडग़ांव एवं फरीदाबाद बर्बाद हो जाएंगे। यहां पर मारुति के लगभग सौ वेंडर हैं जिन्होंने, जिनका कार्य बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज (सीआईआई) हरियाणा चैप्टर के प्रधान राज भाटिया का कहना है कि जापान एवं कोरिया में श्रमिक विरोध करते हैं तो वे प्रोडक्शन बढ़ाते हैं, क्वालिटी अच्छी करते हैं।
वे विरोध के जरिए प्रबंधन को बताते हैं कि वे अच्छे हैं और कंपनी के साथ है। ज्यादा उत्पादन कर सकते हैं। लेकिन यहां का कल्चर नकारात्मक ऊर्जा से भरा हुआ है। प्रोडक्शन बंद करके कोई भी विरोध नहीं होना चाहिए। इससे देश, प्रदेश, मजदूर एवं प्रबंधन सबका नुकसान है।
फरीदाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक कर्नल एस कपूर का कहना है कि जिस प्रदेश में देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी में यह हालात है वहां क्या होगा।
मारुति कहीं और शिफ्ट होती है या फिर अपना विस्तार कहीं और करती है तो यह बात यहां के लिए शर्मनाक होगी। एफएसआईए के अध्यक्ष राजीव चावला का कहना है कि श्रमिक विवाद के चलते 30 वर्ष पुराना मारुति उद्योग यदि यहां से शिफ्ट करता है तो फरीदाबाद एवं गुडग़ांव के लगभग तीन सौ उद्योग भी भाग जाएंगे। श्रमिक विवाद से बर्बादी के अलावा कुछ नहीं मिलेगा।












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