टीम अन्ना के अहसान को भूल तो नहीं गये बिश्नोई?

सुबह मीडिया से बातचीत के दौरान कुलदीप विश्नोई से जब यह पूछा गया कि वह चुनावी मैदान में अन्ना टीम के कूद जाने पर क्या कहना चाहते हैं? इसपर विश्नोई ने ज्यादा कुछ ना कहते हुए साफ शब्दों में कहा कि वो जन लोकपाल बिल का समर्थन और अन्ना हजारे का सम्मान करते हैं लेकिन अपनी जीत में उन्होंने अन्ना का योगदान मानने से इंकार कर दिया। विश्नोई ने कहा कि अन्ना के चलते नहीं वह अपने बल बूते जीते हैं।
विश्नोई ने कहा कि अन्ना की टीम चुनावी मैदान में बहुत देर से आयी और साथ ही साथ उन्होंने किसी भी प्रत्याशी का समर्थन नहीं दिया। विश्नोई ने कहा कि अन्ना टीम ने सिर्फ कांग्रेस को वोट ना देने की अपील की थी जिसका फायदा सिर्फ उन्हें ही नहीं बल्कि सभी 40 उम्मीदवारों को हुआ। बिश्नोई ने ये बोल मीडिया के समक्ष तो बोल दिये, लेकिन क्या वो अपनी पार्टी के उन कार्यकर्ताओं के बीच यह ढिंढोरा पीट सकते हैं, जिन्होंने टीम अन्ना के नाम पर वोट मांगे थे।
हम आपको बता दें कि मतदान से पहले प्रचार के दौरान हरियाणा जनहित कांग्रेस के कार्यकर्ता पूरे हिसार में यही कहते फिर रहे थे कि टीम अन्ना हमारे लिए वोट मांग रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि अगर चुनाव के पहले कार्यकर्ताओं ने अन्ना के नाम पर वोट मांगे तो अब बिश्नोई अन्ना के नाम से दूर क्यों भाग रहे हैं।
हालांकि राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो हो सकता है बिश्नोई अपनी इमेज को और ऊपर उठाने के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं। वैसे यह बात तो निश्चित है कि टीम अन्ना की वजह से ही बिश्नोई को जीत मिल रही है। क्योंकि पिछले साल कांग्रेस को हिसार से ढाई लाख वोट मिले थे, जो इस साल घट कर डेढ़ लाख हो गये। खास बात यह है कि कांग्रेस के वोट सबसे ज्यादा हांसी, नलवा, हिसार, भवानी खेड़ा और आदमपुर में कटे हैं। खास बात यह है कि इन्हीं जगहों पर बिश्नोई सबसे आगे रहे हैं। आंकड़ों की मानें तो कांग्रेस के कटे हुए वोट ही बिश्नोई के खाते में गये हैं और जाहिर है ऐसा टीम अन्ना के निगेटिव कैम्पेन के कारण ही हुआ। अब इस बात को बिश्नोई माने चाहे नहीं मानें।












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