वेश्याओं के पुनर्वास में जुटी पुलिस

डेरा सच्चा सौदा के मुताबिक उनके करीब 1200 स्वयंसेवक ऐसी लड़कियों से शादी करेंगे जो यौन कर्मियों के तौर पर काम कर रही हैं और जो ये काम छोडऩा चाहती हैं। ऐसे ही एक स्वयंसेवक हैं आशीष इंसा जिनका कहना है, 'हमने ये फैसला पूरी तरह सोच समझ कर लिया है। समाज ही इन महिलाओं की बदहाली के लिए जिम्मेदार है और अगर समाज अब भी अपने में सुधार नहीं लाना चाहता तो हमें इसकी परवाह नहीं।' समाज व बिरादरी के उलाहनों की परवाह न करने वाले यह पहाड़ जैसा दिल रखने वाले युवक व परिवार प्रशंसा के पात्र हैं। उन पर किसी प्रकार का दबाव नहीं था।
इनमें से कई युवक बहुराष्ट्रीय कंपनियों में उच्च पदों पर कार्यरत हैं। इसके अलावा कुछ चिकित्सक और व्यापारी भी हैं। यानी शिक्षित युवकों ने सोच-समझ कर ही यौनकर्मियों के साथ विवाह के सूत्र में बंधने का मन बनाया। डेरे से जुड़े जो परिवार इन महिलाओं और उनके बच्चों को कानूनी तौर पर अपनाने का भी निर्णय कर चुके हैं, वे विशिष्ट सम्मान के योग्य हैं। नए जीवन की शुरुआत करने वाली युवतियों ने कभी सोचा भी नहीं था कि उनके जीवन में कोई तारणहार आएगा और अंधकार को दूर करके उजाला फैला देगा।
कोई उन्हें भी पत्नी का दर्जा देगा। वहीं हरियाणा प्रदेश विधि सेवा प्राधिकरण ने देह व्यापार में धकेली गई लड़कियों को कानूनी सहायता देने के लिए एक टोल फ्री हेल्पलाइन शुरू की है । देह व्यापार में धकेली गई लड़कियां कानूनी सहायता लेने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1800-180-2057 पर संपर्क कर सकती हैं । इसमें कहा गया है कि गैर सरकारी संगठनों के सदस्य और अन्य व्यक्ति भी प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष या सचिव को ऐसी घटनाओं की जानकारी देने के लिए इस नंबर का इस्तेमाल कर सकते हैं।












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