दिल्ली: पायलट और बीटेक स्टूडेंटों ने बनाया अपहरण गैंग

बदमाशों ने बताया कि अक्तूबर में उन्होंने सेक्टर 27 से एलजी कंपनी के मैनेजर सुरेश का उसकी वर्ना कार के साथ अपहरण कर लिया था। बाद में इन्होंने सुरेश को परतापुर मेरठ के पास कार से फेंक दिया था। एसएसपी ज्योति नारायण ने बताया कि नोएडा के उद्यमी कपिल गुप्ता के अपहरण को अंजाम देने के बाद बदमाशों के निशाने पर मुजफ्फरनगर का एक बड़ा व्यापारी था। अगर बदमाश मंगलवार को पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ते तो शुक्रवार तक व्यापारी को अगवा कर दस करोड़ से ज्यादा की फिरौती वसूलने की घटना को अंजाम दे देते।
पुलिस अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि अभी इस मामले में आठ दस और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। जिनमें प्रापर्टी डीलर और मकान मालिक भी शामिल हैं। इसके लिए दिल्ली, मुजफ्फरनगर, मेरठ व ग्रेटर नोएडा में छापेमारी जारी है। एसएसपी ज्योति नारायण ने बताया कि सौरभ जैन अपहरणकांड में फिरौती की रकम वसूलने के बाद उससे मिली जानकारी पर ही कपिल गुप्ता का अपहरण किया गया। कपिल गुप्ता के अपहरण की योजना को तैयार कर उसे अंजाम देने में गिरोह ने तीन माह से ज्यादा समय तक होमवर्क किया। कपिल गुप्ता के दफ्तर में काम करने वाली युवती के मित्र मोनू गुर्जर ने कपिल की रैकी की। जानकारी एकत्र कर कपिल और विनय तक पहुंचाई थी। गिरोह के सदस्य अंशुल शर्मा व मोनू गुर्जर ने घटना के एक माह पहले ग्रेटर नोएडा के गामा प्रथम में किराए का कमरा ले लिया और कमरा लेते वक्त खुद को ग्रेटर नोएडा स्थित एक निजी विश्वविद्यालय का छात्र बताया था। इसी मकान में अपहरण के बाद कपिल को रखा था।
बदमाशों ने पुलिस को बताया कि कंकरखेड़ा का रहने वाला मोनू गुर्जर ग्रेटर नोएडा में अपने रिश्तेदार के घर रहकर प्रापर्टी डीलिंग करता है। कंकरखेड़ा की ही रहने वाली उसकी गर्लफ्रेंड डेल्टा कंपनी में काम करती थी। एक दिन उसने मोनू को अपने साथ हुई अभद्रता की जानकारी दी। अभद्रता का आरोप सौरभ पर लगाया। इसके बाद उसने नौकरी छोड़ दी। गर्लफ्रेंड की बेइज्जती का बदला लेने के लिए मोनू ने उसके अपहरण की साजिश रच दी और उसे अमली जामा पहना दिया। फिरौती मिलने के बाद सौरभ ने और बड़े बिजनेसमैन के बारे में जानकारी देने के लिए कहा जो आसानी से फिरौती की रकम दे सके। सौरभ ने कपिल गुप्ता व सेक्टर-8 में एक कत्था बनाने वाली फैक्टरी के मालिक के बारे में जानकारी दी। इसके बाद कपिल का अपहरण करने के लिए रैकी शुरू कर दी गई। कपिल का अपहरण भी मोनू की मुखबिरी के आधार पर कर किया गया।
कपिल और विनय अपहरण कर फिरौती की रकम से एक बड़ी बिल्डर कंपनी खोलना चाहते थे। इसीलिए उन्होंने फिरौती की रकम का बंटवारा नहीं किया था। उनकी योजना आगे और अपहरण की घटनाओं को अंजाम देकर पचास करोड़ के आसपास की रकम एकत्र करने की थी। कपिल गुप्ता को छोड़ने के एवज में मिली रकम से केवल स्कार्पियो व हथियार खरीदे थे।
कपिल, अंशुल बाबरा, अंशुल शर्मा, संदीप कुमार, दीपक, संदीप , अजय और विजय सभी एक साथ मेरठ एक कालेज में पढ़े। सभी केघर कुछ ही दूरी पर थे। कालेज की दोस्ती कालेज छूटने के बाद भी नहीं टूटी और बीटेक व अन्य कोर्स करने के लिए सभी दोस्त इधर उधर चले गए, लेकिन मोबाइल फोन पर संपर्क रहा और अक्सर मेरठ आने पर बैठक भी होती थी लेकिन जल्द से जल्द रुपये कमाने और मोनू की गर्लफ्रेंड की बेइज्जती का बदला ने के लिए दोस्ती गिरोह के रूप में बदल गई।












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