बिजली संकट की गिरफ्त में उत्तर प्रदेश

यही नहीं कोयले की कमी के कारण निजी क्षेत्रा की रोजा तापीय परियोजना से भी प्रदेश को मिलने वाला हिस्सा लगभग आधा रह गया है। प्रवक्ता ने बताया कि कोयला क्षेत्र में हड़ताल, कोयला गीला होने तथा कोयले की कम आपूर्ति के कारण उत्तर प्रदेश राज्य उत्पादन निगम की इकाइयों से भी उत्पादन स्थिर नहीं है। उन्होंने बताया कि केन्द्रीय सेक्टर की जल विद्युत परियोजनाओं से बारिश के बाद मिलने वाली बिजली में भी लगभग 500 मेगावाट की कमी आई है।
प्रवक्ता के मुताबिक द्विपक्षीय समझौते के द्वारा किये गए बिजली करारों के सापेक्ष भी 600 मेगावाट बिजली कम मिल रही है। उन्होंने बताया कि निगम के अध्यक्ष नवनीत सहगल का कहना है कि विषम परिस्थितियों में कारपोरेशन अपने सीमित संसाधनों में अधिकतम विद्युत आपूर्ति की कोशिश कर रहा है लेकिन अभी यह समस्या कुछ दिन और बनी रह सकती है।












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