अनुसूचित जाति आयोग ने कहा एसएसपी को करें गिरफ्तार

आयोग के अध्यक्ष और बाराबंकी से कांग्रेस सांसद पी.एल. पुनिया ने कहा कि भट्टा पारसौल गांव की सात महिलाओं ने पुलिस पर बलात्कार का आरोप लगाया था। इस संबंध में उक्त महिलाओं ने आयोग को शपथ पत्र भी दिया था। श्री पुनिया ने कहा कि महिलाओं ने यह बताया कि वह आरोपी पुलिस वालों की पहचान भी कर सकती हैं।
पुनिया के अनुसार महिलाओं ने अपनी रिपोर्ट लिखे जाने की गुहार स्थानीय पुलिस से लगायी थी लेकिन उनकी रिपोर्ट नहीं लिखी गयी जिसके बाद उन्होंने आयोग से सम्पर्क साधा। पुनिया ने बताया कि शिकायत मिलने पर गौतमबुद्धनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को आयोग के समक्ष पेश होने के लिए चार बार नोटिस जारी किया गया था लेकिन वह पेश नहीं हुए। पुलिस प्रशासन द्वारा आयोग की नोटिस की अनदेखी करने पर आयोग ने गिरफ्तारी का वारण्ट जारी किया।
पुनिया ने बताया कि अनुसूचित जाति से संबंधित शिकायतों की जांच के दौरान आयोग को भारतीय संविधान की धारा 338 के तहत सिविल न्यायालय का अधिकार मिल जाता है। आयोग ने इसी अधिकार के तहत गिरफ्तारी वारण्ट जारी किया है। वारण्ट में पुलिस महानिदेशक को आदेश दिया गया है कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को 24 अक्टूबर को आयोग के समक्ष पेश किया जाए।
उधर इस मामले में राज्य के पुलिस महानिदेशक बृजलाल का कहना है कि उन्हें इस संबंध में अभी फिलहाल कोई जानकारी नहीं है। अध्ययन किया जाएगा और विधिक राय ली जाएगी, इसके बाद कोई कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि अपनी जमीन के अधिग्रहण के विरोध में आन्दोलनरत किसानों और पुलिस में पिछली सात मई को हुए संघर्ष में दो पुलिस वालों समेत चार लोगों की मृत्यु हो गई थी और 50 से अधिक लोग घायल हो गए थे। घटना के बाद भट्टा पारसौल राजनीति का केन्द्र बन गया था। वहां कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी समेत लगभग सभी दलों के बड़े नेताओं ने दौरा किया था।












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