नीतीश भी नहीं चलवा पाये बिहार पुलिस से 21 गोलियां

हुआ यूं कि मुख्यमंत्री और उनके पूरे मंत्रीमंडल के सामने आजाद को बंदूकों की सलामी दी जानी थी। इस मौके पर जवानों को 21 गोलियां फायर करनी थीं लेकिन, सिर्फ 4 ही चलीं। जिसके बाद पुलिसवालों ने घबरा कर मुख्यमंत्री को बताया कि उनकी बंदूक से गोलियां नहीं चल रही हैं। गौर फरमाने वाली बात यह है कि बिहार पुलिस पर 8 करोड़ से ज्यादा की आबादी को सुरक्षा देने की जिम्मेदारी है। लेकिन मधुबनी में पंचायती राज्य मंत्री के निधन के बाद बंदूक की सलामी के दौरान पुलिस और सुरक्षा की पोल खुल गई।
इस दौरान मुख्यमंत्री भूल गए कि वो श्रद्धांजलि देने जमा हुए हैं। कभी बेबस पुलिसवालों की तरफ देखते तो कभी स्व. आजाद की तरफ। इसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भी धैर्य जवाब दे गया। वो भी पटना के लिए रवाना हो गए।
यह तो महज एक घटना है, लेकिन सही मायने में यह बिहार की सुरक्षा पर बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह है, वो भी उस बिहार पर, जो झारखंड और छत्तीसगढ़ के नक्सलवाद से प्रभावित है। फर्ज करिये अगर किसी नक्सली गुट से मुठभेड़ हो जाये और बिहार पुलिस इन्हीं बंदूकों को लेकर मौके पर पहुंच जाये तो क्या होगा। चार गोलियों के बाद लाशें बिछ जायेंगी। नक्सलियों की नहीं पुलिसवालों की।
वैसे पुलिस विभाग के एक कर्मचारी की मानें तो बिहार पुलिस जिन हथियारों का इस्तेमाल कर रही है, वो सालों पुराने हैं। कई बंदूकों में जंग लग गई है। ट्रिगर दबता नहीं। अगर दबा भी तो गोली चल जाएगी, इस बात की कोई गारंटी नहीं है। तो अगर आप बिहार में रह रहे हैं, तो अपनी सुरक्षा को लेकर सचेत रहें।












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