लखनऊ पुलिस ने एक लड़के को अनाथ बनाया

यदि पुलिसकर्मी महेश को पहले ही चिकित्सालय पहुंचा देते तो शायद महेश की जान बच जाती और प्रशांत अनाथ न होता। उन्नाव जिले के प्रयाग नारायण रोड निवासी महेश चन्द्र मिश्रा (45) एक सिक्योरिटी एजेन्सी में गार्ड के पद पर कार्य करता था। नादरगंज स्थित एक पान मशाला फैक्ट्री में नौकरी करने वाला महेश रोज की भांति अपने कार्यालय जा रहा था। उसी वक्त पीछे से आ रही एक तेज रफ्तार जीप ने उसे टक्कर मार दी। लेसा की जीप (यूपी32 सीसी-2357) ने महेश को टक्कर मारी जिसके बाद अंनियंत्रित होकर जीप भी आगे जाकर पलट गई।
जीप की टक्कर लगने के बाद महेश घायल होकर गिर गय। आस-पास के लोगों ने उसे उठाया और सड़क के किनारे लिटाया तथा पुलिस को घटना की जानकारी दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पुलिस कर्मियों ने घायल को चिकित्सालय ले जाने की बजाय महेश की जेब तलाशनी शुरू कर दी। तलाशी लेने के बाद जब पुलिस कर्मियों को उसकी जेब में मोबाइल मिला तो उन्होंने उससे महेश के बेटे प्रशान्त को घटना की सूचना दी। इसके बाद पुलिस कर्मी जीप आगे बढ़ गये तथा जीप के हालचाल लेने लगे।
सरकारी जीप होने के कारण पुलिस वहां भी कुछ नहीं कर सकी। फिलहाल महेश के बेटे को घटनास्थल तक पहुंचने में दो घंटे का समय लगा इस बीच पुलिस कर्मी इधर उधर टहलते रहे और घायल को चिकित्सालय ले जाने की जरूरत नहीं समझी। दो घण्टे बाद प्रशान्त साथियों के साथ उन्नाव से नादरगंज पहुंचा। इसके बाद पुलिस ने घायल महेश को जीप पर लाद कर ट्रामा सेन्टर पहुंचाया और अस्पताल के गेट पर घायल पिता को बेटे को सिपुर्द कर चली गयी। जब प्रशांत पिता को लेकर भीतर पहुंचा तो चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। प्रशांत का कहना था कि यदि पुलिस वाले उसके पिता को पहले ही किसी चिकित्सालय पहुंचा देते तो आज वह अनाथ न होता।












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