क्या अपने ही खास की बलि लेंगे प्रधानमंत्री!

आपको बता दें कि कुछ महीने पहले विकिलिक्स ने खुलासा किया था कि मनमोहन सिंह सिर्फ और सिर्फ चिंदबंरम पर ही भरोसा करते हैं। एक बैठक में मनमोहन ने अमेरिकी अधिकारियों से कहा भी था उन्हें सिर्फ चिदंबरम पर भरोसा है पर अब देखना है 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले मामले में वह अपने सबसे बड़े भरोसेमंद की बलि लेते हैं या नहीं। चिदंबरम के भविष्य को लेकर इस समय सोनिया गांधी के घर पर बैठक चल रही है वहीं सिक्किम से पीएम के लौटते ही उनके घर पर बैठक होगी। देखना है कि इसमें क्या फैसला होता है पर आंतरिक सूत्र बता रहे हैं कि सोनिया गांधी उनके इस्तीफे को स्वीकार करने के पक्ष में हैं जबकि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह चिदंबरम को अपने सहयोगी के रूप में ही देखना चाहते हैं।
गौरतलब है कि वित्त मंत्रालय की चिट्ठी से 2जी के घेरे में आए गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर अपने इस्तीफे तक की पेशकश की थी। वहीं, अमेरिका से दिल्ली पहुंचने के बाद वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की पहली मंजिल दस जनपथ ही रही। सरकार की सांसत की वजह बने अपने मंत्रालय के नोट पर प्रणब ने सोनिया से मुलाकात कर इस चिट्ठी पर स्थिति साफ की। सरकार के गले पड़ी इस मुसीबत के बढ़ने का संकेत चिदंबरम ने दिया। नार्थ ब्लॉक से निकलकर शाम को चिदंबरम ने सीधा दस जनपथ का रुख किया और सोनिया से मिलकर अपना पक्ष रखा।
इस मुलाकात में चिदंबरम ने कहा कि अगर विवाद को विराम देने के लिए उनका इस्तीफा कोई अस्त्र बनता है तो वह इसके लिए तैयार हैं। समझा जाता है कि गृहमंत्री ने यह भी कहा कि वह नहीं चाहते कि उनकी वजह से सरकार और कांग्रेस को फजीहत का सामना करना पड़े। माना जा रहा है आज पीएम के आने के बाद चिदबंरम के मामले में फैसला हो जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चिदबंरम को मनमोहन का सबसे खास साथी माना जाता है। अब देखना है कि विकिलिक्स की बात सच होती है या फिर सत्ता भावनाओं को दबा देती है।












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