उत्तर प्रदेश में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में बेचैनी

विधानसभा चुनाव की तारीख को नजदीक आता देख कांग्रेस व अन्य राजनैतिक दल नयी रणनीतियां तैयार कर रहे हैं इस क्रम में कांग्रेस ने पार्टी की कमेटियों को छोटा करने का निर्णय लिया है। इसके तहत प्रदेश स्तर की कमेटियों से पदाधिकारियों की संख्या पहले ही घटा दी गयी थी लेकिन अब जिला स्तर की कमेटियों में भी पदों को घटया जा रहा है। कार्यकर्ताओं के लिए अब किसी कमेटी में पद पाना आसान नहीं होगा इसकेलिए उन्हें काफी संघर्ष करना होगा। कमेटियों में पदाधिकारियों की संख्या का आदेश जारी होने के साथ ही कार्यकर्ताओं में बेचैनी बढ़ गयी है।
अब जिला शहर कमेटी में अधिक से अधिक 31 सदस्य होंगे। इसमें अध्यक्ष के साथ एक कोषाध्यक्ष, 4 उपाध्यक्ष, 6 महासचिव व शेष सदस्य होंगे। विशेष परिस्थतियों में सचिवों की संख्या बढ़ाकर 8 की जा सकती है लेकिन वह कार्यकारिणी की बैठक में शामिल नहीं हो सकेंगे। इसी प्रकार ब्लाक स्तर पर भी कमेटी पदाधिकारियों की संख्या कम की जाएगी। ब्लाक स्तर की कमेटियों में पदाधिकारियों की संख्या 25 से अधिक नहीं होगी। पार्टी संविधान को बरकरार रखने के सख्त निर्देश दे दिए गये हैं तथा यह भी हिदायत दी गयी है कि यदि कमेटी में मनमाने ढंग से बढ़ोत्तरी की जाती है तो कमेटी की मान्यता समाप्त करने के साथ ही अध्यक्ष के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
पार्टी के इस फरमान के बाद जिला अध्यक्षों के सामने कई समस्याएं खड़ी हो गयी हैं कई ऐसे कार्यकर्ता हैं जिन्होंने पद न मिलने पर पार्र्टी अध्यक्षों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस समस्या से बचने के लिए पार्टी ने निगरानी कमेटियों का सृजन कर नये पद बना दिए हैं लेकिन कार्यकर्ता इससे खुश नहीं है क्योंकि उन्हें ऐसा लग रहा है कि इससे उन्हें किसी प्रकार का अधिकार प्राप्त नहीं होगा। फिलहाल आगामी बैठकों में इस समस्या को समाप्त करने के लिए अन्य निर्णय लिए जाने की संभावना है।












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