बसपा पर लगे दाग धोने में जुटीं मायावती

Mayawati's strict action against MP, MLA's
लखनऊ। विपक्षी मायावती पर एक के बाद एक भ्रष्टाचार के आरोप लगाते जा रहे है बावजूद इसके मायावती पार्टी की छवि सुधारने में जुटी हैं। इसका ताज़ा उदाहरण है मेरठ के विधायक हाजी याकूब कुरैशी का निलंबन। मायावती ने एक झटके में कुरैशी को निलंबित करके यह साबित कर दिया कि वो पार्टी पर जरा भी दाग बर्दाश्‍त नहीं करेंगी। माया के पिछले एक्‍शन से यही साबित होता है कि मायावती की डिक्‍शनरी में माफी शब्‍द नहीं।

मई 2007 में राज्य की बागडोर संभालने के बाद से लेकर अब तक मायावती ने 26 लोगों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया। इन 26 लोगों में सांसंद, मंत्री, मंत्री स्तर का दर्जा प्राप्त पदाधिकारी व विधायक शामिल हैं। बसपा के पदाधिकारी कहते हैं कि बहन जी की डिक्शनरी में माफीशब्द नहीं है शायद यही कारण है कि मायावती किसी की परवाह न करते हुए अपने सांसदों व मंत्रियों को पलक छपकते ही निलम्बित कर देती हैं। सूत्र बताते हैं कि मायावती पार्टी से हटाने से पूर्व ही पदाधिकारी को निलम्बित किए जाने की चेतावनी अवश्य दे दी जाती है। हाल में सांसद धनंजय सिंह और विधायक योगेन्द्र सागर के निलंबन और विधायक अशोक चन्देल की पार्टी से बर्खास्तगी से पहले मायावती ने पहला झटका सांसद उमाकांत यादव को दिया था। आजमगढ़ में एक जमीन पर जबरन कब्जा करने के आरोप में मुख्यमंत्री ने यादव को उस वक्त गिरफ्तार कराया था, जब वह मायावती के सरकार आवास पर आए था। इतना ही नहीं उन्होंने यादव को पार्टी से बाहर भी कर दिया।

अगला नाम आया धमार्थ कार्यमंत्री राजेश त्रिपाठी का जिन्हें लोकायुक्त की जांच में दोषी पाये जाने के बाद 25 दिसम्बर 2010 को मंत्री राजेश त्रिपाठी को मंत्री पद से हटा दिया गया। 7 अगस्त को लोकायुक्त की ही सिफारिश पर मुख्यमंत्री मायावती ने दुग्ध विकास मंत्री अवधपाल सिंह को मंत्री पद से हटाया और बाद में पार्टी की सदस्यता से भी बर्खास्त कर दिया। इसी वक्त प्रदेश का वह वाकया हुआ जिसने राज्य में राजनीतिक भूचाल ला दिया। दो-दो मुख्य चिकित्साधिकारियों की हत्या के बाद मायावती ने अपने सबसे नजदीकी मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा को भी एक झटके में मंत्रिमंडल से निकाल बाहर किया।

कुशवाहा के साथ स्वास्थ्य मंत्री अनन्त कुमार मिश्र से भी इस्तीफा ले लिया गया। उनके साथ ही भूमि विकास एवं जल संसाधन मंत्री अशोक कुमार दोहरे, मुस्लिम एवं समाज कल्याण राज्य मंत्री विद्या चौधरी, सूचना मंत्री सुधीर गोयल, राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त पन्ना लाल कश्यप, राज्य मंत्री रघुनाथ प्रसाद शंखवार, राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त इन्तजार आब्दी से भी इस्तीफे लिये गये।

इंजीनियर मनोज गुप्ता हत्याकाण्ड में सजायाफ्ता विधायक शेखर तिवारी, संगीन आरोपों में घिरे विधायक गुड्डू पण्डित और बांदा के बहुचॢचत शीलूकाण्ड में फंसे विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी को भी बसपा अध्यक्ष ने पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने में देर नहीं लगायी। पार्टी के एक विधायक फरीद महफूज किदवई के सपा में शामिल होने के तत्काल बाद विधानसभा अध्यक्ष के यहां याचिका दाखिल करवा उनकी विधानसभा से सदस्यता समाप्त कर दी गयी। इतना ही नहीं आर.के. चौधरी, रामसमुझ, राजबहादुर और बरखूराम वर्मा जैसे दिग्गजों को भी पार्टी से बाहर निकाला गया। ज्ञात हो कि पार्टी से निकाले गये लोगों में से केवल बरखू राम वर्मा की ही वापसी हुई थी हालांकि अब वह इस दुनिया में नहीं हैं। मायावती के इन फैसलों के बारे में बसपा कहती है कि बहन जी अनुशासन पसंद हैं और किसी भी गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं करतीं जिसके उदाहरण जनता देख रही है। जबकि विपक्षी इसे मजबूरी में उठाया गया कदम करार दे रही है।

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