आतंकी अफजल के अनुभवों को बंटने नहीं देगी सरकार

जिससे प्रशासन को लगता है कि यह किताब बाजार में आ जाने के बाद सामाजिक सौहार्द के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। इस किताब को मूर्त रूप दिया है तिहाड़ जेल के तीन नंबर के जेलर मनोज द्विवेदी ने। सूत्रों ने बताया कि इस बाबत तिहाड़ प्रशासन को एक नोटिस भी जारी किया गया है जिसमें किताब के बारे में जानकारी मांगी गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अफजल गुरु के अनुभवों पर लिखी किताब पर तिहाड़ प्रशासन ने रोक लगा दी है। तिहाड़ जेल प्रशासन ने कहा है कि किताब के प्रकाशन के बाद समाज में अव्यवस्था फैल सकती है। इसलिए इस किताब को प्रकाशित नहीं किया जा सकता। आपको बता दें कि अफजल पर लिखी पुस्तक से पहले इसकी पांडुलिपि तैयार की गई थी और जेल प्रशासन से पुस्तक के प्रकाशन की अनुमति लेनी थी। जब यह बात मीडिया में लीक हुई तो जेल प्रशासन ने जेल अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया। जेल प्रशासन के कडे़ रुख को देखते हुए प्रकाशन पर रोक लगा दिया।
गौरतलब है कि तिहाड़ जेल नंबर तीन के जेलर मनोज द्विवेदी साहित्य प्रेमी और तेज तर्रार जेलर माने जाते हैं। इनके कार्यकाल में जेल में कई विकास किए गए। जेल की ड्यूटी करते-करते उन्होंने अफजल पर किताब लिखा, लेकिन जेल प्रशासन ने उनकी किताब प्रकाशित कराने पर यह कहकर रोक लगा दी कि आप अभी ड्यूटी पर हैं इसलिए किताब प्रकाशित नहीं करा सकते।
तिहाड़ जेल के प्रवक्ता सुनील गुप्ता ने बताया कि जेल प्रशासन ने मनोज द्विवेदी की पुस्तक पर रोक लगा दी है। इस किताब के अनुसार, अफजल ने बताया था कि यदि दिसंबर 2001 का यह आतंकी हमला कामयाब होता तो वे लोग जम्मू-कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बना देते और चर्चा का दौर शुरू हो जाता। छह अध्याय का यह दस्तावेज हमले से शुरू होता है।
पहले अध्याय में 13 दिसंबर के घटनाक्रम की जानकारी है। दस्तावेज मौत की सजा पाने वाले अफजल की गिरफ्तारी के साथ समाप्त होता है। आतंकियों को विश्वास था कि जिस कार में उन्होंने विस्फोटक लगाए हैं, वे फट जाएंगे। अफजल ने बताया था कि उन्होंने संसद हमले के एक दिन पहले बम-विस्फोटक लगाकर कार को पुलिस स्टेशन के सामने पार्क किया था। उन्हें डर था कि यह कार चोरी हो सकती है, लेकिन किसी पुलिसकर्मी ने इसकी जांच की जहमत नहीं उठाई, लेकिन कार बम नहीं फटा।
यदि हमला सफल हो जाता तो हमलावरों के दिमाग में वे नाम भी थे जिनसे वे बातचीत करना चाहते थे। दस्तावेज को द्विवेदी और अफजल के बीच हुई 200 घंटे की बातचीत के बाद संकलित किया गया है। यह चर्चा मार्च 2009 से दिसंबर 2010 के बीच हुई। एक अध्याय में अफजल के बचपन व उसके पाक पहुंचने की स्थितियों पर प्रकाश डाला गया है।
पुस्तक में मैंने अफजल के पाक जाने और आतंकी ट्रेनिंग लेने के तमाम कारणों का जिक्र किया है। पाक से लौटकर इस आतंकी ने महसूस किया कि उसे इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके कारण उसने आतंकवाद से निजात पाने और सामान्य जिंदगी बसर करने का फैसला किया था। उसने न केवल एमबीबीएस प्रथम वर्ष की पढ़ाई पूरी की बल्कि आईईएस परीक्षा के लिए भी प्रयास किए थे। पुस्तक में यह भी खुलासा किया गया कि अफजल के पूर्वज ब्राह्मण थे और कई पीढ़ियों पहले उन्होंने धर्म परिवर्तन कर इस्लाम का रुख किया था।












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