'सरकार की गरीबी परिभाषा गरीबी का मजाक'

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता डा. गिरीश ने कहा कि केन्द्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर गरीबी की जो परिभाषा दी है वह गरीबों का मजाक उड़ाना और उनके जीवन के साथ खिलवाड़ करना है। उन्होंने कहा कि सरकार यदि यह मानती है कि 26 और 32 रूपये प्रतिदिन की आय वाले गरीब नहीं हैं तो उसे सभी विधानसभा सदस्यों और सांसदों का मासिक वेतन भी इसी दर पर निर्धारित कर देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जो लोग सत्ता में आने के लिए छटपटाहट दिखा रहे हैं उन्हें प्रधानमंत्री पद का दावेदार अमरीका ने ही घोषित किया है। इन सभी को 32 रूपये प्रतिदिन प्रति व्यक्ति गुजारा करने का आदर्श स्वयं प्रस्तुत करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार को गरीबों के साथ ऐसा मजाक नहीं करना चाहिए बल्कि गरीबी की रेखा को राष्ट्रीय स्तर पर पारिभाषित करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि जब तक यह काम पूरा नहीं हो जाता तब तक 100 रूपये प्रतिदिन प्रति व्यक्ति खर्च करने की क्षमता रखने वाले व्यक्ति को भी गरीबी की रेखा के अन्तर्गत माना जाना चाहिए। उन्होंने कटाक्ष किया कि गरीबी की सीमा का निर्धारण गरीबों के बीच बैठकर होना चाहिए न कि वातनुकूलित कमरों में बैठकर करना चाहिए।












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